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संभलकर चलना, गिरे तो निकालना होगा मुश्किल...हाइवे के नालों पर न बाउंड्री, न पटरी

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बदायूं। शहर से होकर गुजरने वाले बरेली-मथुरा हाइवे पर सड़क किनारे बड़े नाले हैं। कई जगहों पर इन नालों के बाहर कोई दीवार या साइड पटरी नहीं है, जिससे वाहन चालकों को अक्सर धोखा हो जाता है। मोड़ों पर तो अक्सर वाहन चालक इसमें गिर जाते हैं। कई बार जानवर भी इसमें गिरे हैं, लेकिन नगरपालिका प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। रात में अक्सर इस रोड पर भारी वाहन भी गुजरते हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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शहर के पानी के निकास के लिए चारों ओर बड़े नाले बने हैं। भारी आवाजाही के बीच गुजरते नाले इतने गहरे हैं कि कोई गिर जाए तो उसका पता न चले। इन नालों के बाहर न तो कोई दीवार है और न साइड पटरी। ग्रिल भी इन पर नहीं लगाई गई है। कई स्थानों पर नाले की पटरी बनी भी है तो वह भी जर्जर हो चुकी है। पुलिस लाइन से लालपुल की ओर जाने वाली सड़क के कुछ हिस्सों में नाले का निर्माण सड़क की ऊंचाई में किया गया है। इसके बाद नाले को पाटा भी नहीं गया और न ही दीवार बनाई। ऐसे में बरसात के समय सड़कों पर होते जल भराव के बीच सड़क और नाले का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है। कहीं कहीं तो नाले पूरी तरह ढह गए हैं। पालिका ने कभी न तो इनको पाटने की कोशिश की ओर न कभी इन पर ग्रिल ही लगवाई। ऐसे में वाहन चालक और जानवर अक्सर इनकी चपेट में आ जाते हैं।
- शहर के पुलिस लाइन के समीप बने नाले की दीवार और पटरी न होने की वजह से इसकी मिट्टी भी बरसात के समय में नाले में बह गई। यहां सड़क इतनी ढालू हो गई कि अचानक से पहुंचे वाला व्यक्ति सीधा नाले में ही गिरेगा। करीब पंद्रह दिन पहले भी एक लगभग तीन वर्षीय बच्चा भी इसमें जा गिरा। गनीमत रही कि उसको समय रहते निकाल लिया गया और उसकी जान बच गई।
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टूटे नालों को बनाने और उनको कवर कराने के लिए शासन को डिमांड बनाकर भेजी है। जैसे ही शासन से धनराशि आवंटित होती है। उसके बाद में नालों पर विशेष अभियान चलाकर काम शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल नालों के लिए करीब पांच करोड़ का प्रस्ताव भेजा है।
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-दीपमाला गोयल, पालिकाध्यक्ष
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