बदायूं में आत्मदाह की कोशिश करने वाले गुलफाम के मृत्यु पूर्व बयान पुलिसकर्मियों के गले की फांस बन सकती है। एसएसपी ऑफिस में खुद को आग लगाने के बाद उसे जिला अस्पताल से जब बरेली रेफर किया जा रहा था, तब वह चीख-चीखकर पुलिस और विधायक पर आरोप लगा रहा था। पुलिस उसे इलाज के लिए जल्द से जल्द भेजना चाह रही थी, जबकि वह अपने बयान देने में लगा था। अब जबकि गुलफाम की मौत हो चुकी है, ऐसे में उसके यह बयान पुलिस के गले की फांस बन सकती है।
गुलफाम की रविवार को मौत हो चुकी है, लेकिन वह अपनी मौत का जिम्मेदार पुलिस को बताकर गया है। उसने सुसराल पक्ष और पुलिस के सिस्टम से तंग आकर एक जनवरी को एसएसपी कार्यालय में आत्मदाह की कोशिश की थी। जब वह जिला अस्पताल पहुंचा तो वह चीख-चीखकर अपने ऊपर हुए पुलिसिया उत्पीड़न को बता रहा था।
सीओ सिटी संजीव कुमार पर आरोप लगाए। कहा कि उन्होंने डोडे में जेल भेजने की धमकी दी थी। पुलिस को कह रहा था गद्दार, पुलिस गद्दार। विधायक ने पुलिस के हाथ बांध दिए। कार्रवाई नहीं होने दी। इसके अलावा बरेली में भी उसके मृत्यु पूर्व बयान दर्ज किए गए हैं।
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बताया जा रहा है कि गुलफाम ने अपने बयानों में पुलिस के खिलाफ भी बयान दिए हैं। यहां भी गुलफाम ने पुलिस को ही आत्मदाह के पीछे का जिम्मेदार बताया था। ऐसे में अब मरने से पहले दिए गए गुलफाम के बयानों ने पुलिस को कठघरे में ला खड़ा किया है। उसके बयान पर अगर कार्रवाई होती है तो सीओ सिटी, सदर कोतवाल और सदर विधायक लपेटे में आ सकते है।