बदायूं। जिले में करीब 66 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए 222 अमृत सरोवर बदहाल हैं। अधिकांश अमृत सरोवर को लोगों ने डंपिंग ग्राउंड बना दिया है। कुछ जगह पर कब्जा कर उपले पाथना शुरू कर दिया है। कहीं पर गांव के नाले-नालियों का गंदा पानी जा रहा है। ऐसे में तैयार अमृत सरोवर निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं।
शासन के निर्देश पर जिले में अमृत सरोवरों का निर्माण कराया गया, ताकि इनमें जल संचयन किया जा सके। जिले में 285 अमृत सरोवर बनाए जाने थे लेकिन अब तक करीब 222 ही बनकर तैयार किए गए हैं। अधिकारियों की अनदेखी की वजह से लोगों ने इस पर फिर से कब्जा कर अपने निजी उपयोग में लाना शुरू कर दिया। यहां तक कि कई गांवाें में अमृत सरोवरों में कूंड़ा डाला जा रहा है।
खंडक का अमृत सरोवर सूखा
सहसवान। खंडक में अमृत सरोवर का निर्माण कराया गया था। बनाए बन जाने से गांव के आसपास के क्षेत्र में जलस्तर बेहतर होने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। गांव में बना यह अमृत पूरी तरह से सूख चुका है। गांव के महेश ने बताया कि अमृत सरोवर को जिस उद्देश्य से बनाया गया था, उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
गंदगी से पाटा जा रहा अमृत सरोवर
उसहैत। गांव टिकरा बछेली में बने अमृत सरोवर में कूड़ा डाला जा रहा है। गांव का गंदा पानी भी अमृत सरोवर में छोड़ा जा रहा है। अमृत सरोवर में जलकुंभी फैली है। उसे हटवाने की पहल नहीं की गई। गांव के श्याम सिंह ने बताया कि अधिकारियों की अनदेखी की वजह से अमृत सरोवर का यह हाल है।
वर्जन
- जिले में अमृत सरोवरों की साफ-सफाई एक जून से कराने के निर्देश मिले हैं। इसको लेकर सभी संबंधित अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। मानसून आने से पहले अमृत सरोवरों को ठीक करा दिया जाएगा, जिससे पानी उसमें भर सके। 21 जून को जिले भर में अमृत सरोवरों के किनारे योग कराया जाएगा। - अरूण कुमार पांडेय, डीसी मनरेगा
सहसवान के गांव खंदक में सूखा पड़ा अमृत सरोवर। संवाद- फोटो : संवाद