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Budaun News: भूमि कब्जा मुक्त कराने पहुंची वन विभाग की टीम पर हमला

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कटरी में हमले में क्षतिग्रस्त ​वन विभाग के अफसरों की कार। स्रोत: स्वयं
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उझानी (बदायूं)। गंगापार कटरी इलाके में सोमवार रात सरकारी भूमि कब्जा मुक्त कराने पहुंची वन विभाग की टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। हमले में कार समेत दो वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। हमलावर ग्रामीणों ने मारपीट की तो वन विभाग की टीम को मौके पर जान बचाकर भागना पड़ गया। इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए डीएफओ निधि चौहान मंगलवार को एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह से मिलीं। आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की तैयारी है।
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वन विभाग की टीम पर हमले का मामला सोमवार रात करीब एक बजे का है। चंदनपुर रेंज में वन विभाग की सैकड़ों बीघा जमीन है। आरोप है कि अधिकांश जमीन पर कासगंज जिले में सोरों कोतवाली क्षेत्र और बदायूं जिले की कटरी के ग्रामीणों ने कब्जा कर सरसों और गेहूं की फसलें उगा रखी हैं।

वन कर्मियों ने पिछले दिनों विभागीय जमीन को कब्जा मुक्त कराने की कोशिश शुरू की थी। बताते हैं कि उस वक्त सफलता नहीं मिली। सोमवार रात करीब एक बजे रेंजर विक्रेंद्र कुमार, गार्ड वीरेंद्र कुमार, वन दरोगा शुभम प्रताप और आदित्य गंगवार के साथ गंगापार इलाके में पहुंचे। टीम के साथ कंटीमेंटर और हैरों लगे ट्रैक्टर भी थे।
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वन कर्मी ट्रैक्टरों के जरिये फसल की जोताई करके जमीन कब्जा मुक्त कराते, उससे पहले ही ग्रामीणों को भनक लग गई। आरोप है कब्जाधारी कई ग्रामीणों ने खेतों में आकर हंगामा शुरू कर दिया। भीड़ में शामिल ग्रामीणों ने वन कर्मियों के साथ मारपीट भी की। हमले के दौरान खुद को घिरता देख वनकर्मी वाहनों में बैठकर सुरक्षित स्थान की ओर निकले तो उनकी दोनों कार में तोड़फोड़ की गई। दोनों कार के शीशे चकनाचूर हो गए। एक वाहन में तो लोहे की कुल्हाड़ी भी फंस गई।
जान बचाकर मौके से भागे वन कर्मियों ने तड़के चार बजे कोतवाली आकर पुलिस से शिकायत की। बाद में डीएफओ निधि चौहान के नेतृत्व में वन कर्मी जिला मुख्यालय पर एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह से मिले। इसे लेकर प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कुमार ने बताया कि वन कर्मियों पर हमले की जानकारी मिली है, लेकिन कार्रवाई के लिए उनकी ओर से कोतवाली में अभी तहरीर नहीं दी गई है। फिर भी पुलिस मामले की जांच कर रही है। शिकायती पत्र मिलने के बाद आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।


इस मामले में कार्रवाई के लिए डीएफओ ने मुलाकात की है। वन विभाग की तरफ से जो शिकायती पत्र दिया जाएगा उस आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। पुलिस पूरे मामले की जांच कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। - डॉ बृजेश कुमार सिह, एसएसपी



गंगा किनारे वन विभाग की भूमि है। उस भूमि पर पौधरोपण किया जाना है। सोमवार रात टीम भूमि कब्जा मुक्त कराने गई तो हमला कर दिया गया। दो वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कार्रवाई की जा रही है। - निधि चौहान, डीएफओ



प्रशासन और पुलिस को साथ लिए बिना ही विभाग के लोग पहुंचे थे कब्जा मुक्त कराने
सालों से वन विभाग की जमीन पर करते आ रहे हैं खेती, विभाग नहीं करा पा रहा खाली
- जिले में वन विभाग की हजारों बीघा जमीन पर दबंगों ने कर रखा है कब्जा
संवाद न्यूज एजेंसी
उझानी। जिले में हजारों बीघा जमीन ऐसी है जहां दबंगों का कब्जा है। इसे कब्जा मुक्त कराने के लिए कभी भी वन विभाग ने पहल नहीं की। सहसवान व जरीफनगर क्षेत्र में तो विभाग के ही अधिकारी जमीन पर खेती कराने के नाम पर लाखों रुपये हर साल किसानों से वसूल करते आ रहे हैं, जबकि यहां की जमीन को ग्रामीणों द्वारा कब्जा किया हुआ दिखाया जा रहा है। ऐसी ही करीब सौ बीघा जमीन उझानी क्षेत्र में गंगा की कटरी में हैं। जहां कासगंज जिले के नगरिया निवासी किसानों का कब्जा है।
इसी जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए ही विभाग की टीम कटरी में सोमवार रात को पहुंची थी। उस जमीन पर पौधरोपण प्रस्तावित है। कब्जे की जानकारी तो विभागीय अफसरों को पहले से थी, लेकिन अफसरों ने कार्रवाई शुरू करने से पहले पुलिस का सहयोग नहीं लिया। आरोप है कि वन कर्मियों पर हमले के दौरान ग्रामीणों की ओर से भी फायरिंग भी की गई। गनीमत रही कि किसी को गाेली नहीं लगी। विभाग के कर्मचारी इसे लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। हमलावर ग्रामीणों के पास लाठी- डंडे तो बहुतायत में थे।



पकड़े जाने के डर से घर छोड़कर भागे हमलावर

सोमवार रात में हमले के बाद वन विभाग के अफसर और कर्मचारी अपने साथ पीएसी लेकर मंगलवार दोपहर मौके पर पहुंचे तो उन्हें आसपास इलाके में कोई भी व्यक्ति नहीं मिला। हमलावरों में अधिकतर ग्रामीण कासगंज जिले के जिस गांव के निवासी बताए गए हैं, उनकी तलाश भी शुरू कर दी गई है। पकड़े जाने के डर से कई ग्रामीण अपने घरों से भाग गए हैं। इसके बाद भी वन कर्मियों ने अपने संपर्क सूत्रों के जरिये हमलावरों के नाम और पते जुटाने से शुरू कर दिए हैं।




कब्जे को लेकर वन कर्मियों की भूमिका पर उठ चुके हैं सवाल

गंगा किनारे की वन विभाग की भूमि पर कब्जे होने का मामला कोई नया नहीं है। गुजरे सालों में भी ऐसे ही मामले सामने आते रहे हैं। सरकारी भूमि ही नहीं, इलाके के दबंग लोग सीधे- साधे किसानों की जमीनों पर कब्जा कर लेते हैं। ग्रामीणों की भूमि पर कब्जों को लेकर खूनी संघर्ष भी हो चुके हैं। कासगंज जिले में सिकंदरपुर वैश्य और सोरों कोतवाली क्षेत्र तो बदायूं के गांव हुसैनपुर खेड़ा, पिपरौल और सहसवान के गांव चंदनपुर के लोगों के बीच जंग में हत्याएं भी हो चुकी हैं। शोर तो इस बात का भी मचता रहा है कि सरकारी जमीनों पर जब भी कब्जा कर फसल उगाई जाती है, हर बार वन विभाग के कर्मचारियों की भूमिका सवाल उठते रहे हैं।


गंगा किनारे वन विभाग की भूमि है। उस भूमि पर पौधारोपण किया जाना है। पौधारोपण से पहले निरीक्षण कराया गया तो कब्जे का मामला सामने आया था। टीम भूमि कब्जा मुक्त कराने गई तो हमला कर दिया गया। दो वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कार्रवाई की जा रही है।- निधि चौहान, डीएफओ

कटरी में हमले में क्षतिग्रस्त वन विभाग के अफसरों की कार। स्रोत: स्वयं

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