- ई-टेंडरिंग से खरीदी जाएंगी आशा संगिनी को साइकिल
- पहले भी दो बार हो चुके टेंडर, कोई फर्म आगे नहीं आई
गांव-देहात में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और आशा वर्कर्स के सहयोग को रखी गईं संगिनी को साइकिल मिलने में देरी हो सकती है। जिले में साइकिल खरीद के लिए अब ई-टेंडरिंग के तहत प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हालांकि, साइकिल खरीदने के लिए पहले दो बार टेंडर हो चुके हैं। शासन की ओर से साइकिल की कीमत काफी कम रखे जाने किी वजह से कोई फर्म साइकिलों की सप्लाई के लिए तैयार नहीं हुई। ऐसे में, टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करना पड़ा।
आशा वर्कर्स के सहयोग को जिले में 160 संगिनी हैं। पिछली सरकार ने इनको मुफ्त में साइकिल मुहैया कराने का फैसला किया था। इसके लिए बजट भी जारी कर दिया गया। शासन ने एक साइकिल की कीमत तीन हजार रुपये तय की थी। इसके साथ यह भी शर्त है कि साइकिल ब्रांडेड कंपनी की होनी चाहिए। बाजार में ब्रांडेड कंपनी की कोई भी साइकिल तीन हजार रुपये की नहीं है। यही वजह रही कि कोई भी फर्म इतने रुपये में साइकिल देने को आगे नहीं आई। स्वास्थ्य विभाग ने साइकिल खरीदने के लिए दो बार टेंडर प्रक्रिया भी की। इसे भी निरस्त करना पड़ा। अब नई सरकार बनने के बाद ई-टेंडरिंग के जरिए साइकिल खरीद का फरमान आया है। इधर, यह भी कहा जा रहा है कि साइकिल की कीमत पहले से ज्यादा बढ़ चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संबंध में शासन को भी लिखा गया है। अगर शासन स्तर से साइकिल की निर्धारित कीमत में इजाफा नहीं होता तो आशा संगिनियों को मुफ्त में साइकिल मिलना मुश्किल होगा।
वर्जन-
साइकिल की कीमतों के बारे में शासन को लिखा गया है। साइकिलों की खरीद अब ई-टेंडरिंग प्रक्रिया से की जाएगी। जो भी दिशा निर्देश मिलते हैं। उसके हिसाब से काम किया जाएगा।
-डॉ. नेमी चंद्रा, सीएमओ