भूगर्भ जल संकट से जूझ रहे बदायूं जिला को उबारने के प्रयास शुरू हो गए हैं। पानी से खाली यहां की धरती की खाली कोख भरने के लिए जिला प्रशासन ने 6246 लाख के प्रस्ताव बनवाए हैं। इसकी धनराशि के मंजूर होने पर इस संकट से कितनी मुक्ति मिली यह बात भी सामने आ जाएगी।
प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। इसके लिए कई विभागों की टीम बनाकर लघु सिंचाई विभाग को नोडल विभाग बनाकर वॉटर रीचार्जिंग को प्रस्ताव बनवाए हैं। विभिन्न विभागों ने इस पर काम किया है। अपने प्रस्ताव भेज दिए हैं। इनमें तालाबों की सिल्ट सफाई, पौधारोपण आदि के अलावा चैक डेमों का निर्माण, नाले मेढ़ बंदी आदि के प्रस्ताव शामिल हैं। अभी तक मिले प्रस्तावों के लिए 6246 लाख की रकम की जरूरत है। प्रस्ताव सरकार को भेजे जाएंगे। धन स्वीकृति होने पर वाटर रीचार्जिंग के काम शुरू हो जाएंगे।
जिले के चार ब्लाक डार्क जोन में
पिछले एक दशक में जाएं तो जिले में जब 18 ब्लाक हुआ करते थे तो 12 ब्लाक तक भूगर्भ जल संकट के कारण डार्क और सेमीक्रिटिकल श्रेणी में रहने लगे। संभल जिला अलग बन जाने के बाद 15 ब्लाक रह गए। इसमें चार ब्लाक डार्क और इतने ही सेमीक्रिटिकल की श्रेणी में आते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बदायूं जिले की स्थिति कितनी खराब है।
हालत बदतर, हैंडपंपों के हलक सूखे
जिले में लगातार गिरता जा रहे भूगर्भ संकट का हाल यह है कि बड़ी संख्या में हैंडपंप सूखते जा रहे हैं। हैंडपंप प्राइवेट हों या सरकारी रीबोर कराने पड़ रहे हैं। तालाब ही नहीं नदियों के हलक भी सूखे पड़े हैं। आसन्न जल संकट को देखते हुए लोग परेशान हो उठे हैं।
सिंचाई के साधन बदलने की जरूरत
जिले में सिंचाई का सबसे बड़ा साधन नलकूप हैं। यानि भूगर्भ जल का अत्याधिक दोहन। जानकारों की मानें तो वॉटर रीचार्ज से अधिक महत्व दोहन कम करने का है। सिंचाई के अलावा पेयजल में भी नलकूप और सबमर्शिबलों की संख्या बढ़ रही है।
पहले भी वॉटर रीचार्जिंग के प्रयास हुए हैं। इसी की सफलता से उत्साहित होकर वॉटर रीचार्जिंग के प्रयास जारी रहने चाहिए। जिलाधिकारी इसके प्रति गंभीर है। जल दोहन रोकने के बारे में भी प्रयास होंगे।
- महेश चंद्र सक्सेना, एई, लघु सिंचाई