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Budaun News: अकीदत से रखा रोजा, सुबह को सहरी और शाम को हुआ इफ्तार

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मोहम्मद हसन
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बदायूं। रमजान मुबारक का पहला रोजा अकीदत और कुरान शरीफ की तिलावत के बीच रखा गया। मुस्लिम समुदाय के लोगों में उत्साह देखने को मिला। सहरी के बाद लोगों ने रोजे की नीयत की। दिन भर इबादत में मशगूल रहे। मस्जिदों में नमाजियों की अच्छी खासी भीड़ उमड़ी, जहां लोगों ने अल्लाह ताला की राह में दुआएं मांगीं और मुल्क में अमन-चैन की दुआ की। वहीं तय समय पर रोजा इफ्तार किया गया।
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शहर की शम्सी जामा मस्जिद सहित सभी मस्जिदों और दरगाहों के अलावा घरों में शाम 6 बजकर 10 मिनट पर रोजा इफ्तार किया गया। इस खासी रौनक रही। इफ्तार में लोगों ने खजूर, फ्रूट, पकौड़ी सहित कई तरह के पकवान से रोजा खोला और पानी पीया। एक-दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी।
इसके बाद सभी मस्जिदों में विशेष तरावीह नमाज की तैयारी में लग गए। बाजारों में भी रौनक बढ़ गई। जहां रोजमर्रा की जरूरत की चीजों और इफ्तार के सामान की खरीदारी तेज हो गई है। वहीं जामा मस्जिद सहित सभी मस्जिदों और दरगाहों मुस्लिम बाहुल क्षेत्रों में सजावट व रोशनी की गई है।
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मुफ्ती शाने आलम उदयपुरी ने कहा कि रमजान सब्र, इबादत और इंसानियत का पैगाम देता है। उन्होंने लोगों से आपसी भाईचारा बनाए रखने और जरूरतमंदों की मदद करने की अपील की।
सैदपुर। कस्बे में रोजेदारों ने पहले रोज़े के अवसर पर इबादत के साथ नमाज पढ़ने के बाद शाम को निश्चित समय पर रोजा इफ्तार किया और गरीब मुसलमान परिवारों को कुछ लोगों ने इफ्तार का सामान उनके घरों पर पहुंचाया।



पहला रोजा रखकर नन्हे रोजेदार रहे उत्साहित
मैंने पहला रोजा रखा है। इसके लिए घरवालों की ओर से पूरा सहयोग किया गया, तब जाके मुझे रोजा रखने में मदद मिल पाई। घर में तरह-तरह के पकवान इफ्तारी में बनाए गए थे। - मोहम्मद हसन

मेरी मां ने सुबह में उठाकर सहरी खिलाई और पहला रोजा रखने का हौसला दिया। परिवार के सभी सदस्यों ने मुझे दुआएं और मुबारकबाद दी। - आहिल

मैं बड़ों को रोजा रखते हुए देखता था, इस बार मैंने भी रोजा रखा, जिसके लिए घरवालों की ओर पूरा सहयोग किया जा रहा है। - हैदर अली



मैंने पिछले रमजान में भी घरवालों को रोजा रखने के लिए कहा था, लेकिन तब उन्होंने मना कर दिया था। इस बार मुझे रोजा रखने में मदद कर रहे हैं। - नूजी


बड़ों को रोजा रखते हुए देखकर बड़ी उत्सुकता रहती थी कि मैं भी रोजा रखूं। इस बार पहला रोजा रखा है, बड़ा अच्छा लग रहा है। - मुहम्मद इनआम सकलैनी

मोहम्मद हसन

मोहम्मद हसन

मोहम्मद हसन

मोहम्मद हसन

मोहम्मद हसन

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