बेसिक शिक्षा विभाग में कनिष्ठ लिपिक के गलत चयन के मामले में बड़े बाबू की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। आरोप है कि मृतक आश्रित कोटे में बाबू की नौकरी लगवाने में बडे़ बाबू का अहम रोल था। फर्जी नियुक्ति में फंसा बाबू भी पहले मांगे गए जवाब में इस बात का जिक्र करते हुए अपना पक्ष रख चुका है।
शिकायतकर्ता के आधार पर मृतक आश्रित में गलत चयन किए जाने के आरोप में हुई जांच के बाद प्रथम दृष्टया सहीं पाए जाने पर बीएसए ने कनिष्ठ लिपिक को नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह में साक्ष्य प्रस्तुत करने का आदेश दे दिया। वहीं मंगलवार को इसमें विभाग के ही एक और बाबू की संलिप्तता होने की बात सामने आने लगी। विभागीय जानकार बताते हैं कि मृतक आश्रित कोटे में नौकरी के आवेदन करने के लिए जो फाइल चलाई गई, उसमें विभाग के बाबू को सभी मामलों की जानकारी दी। बावजूद उन्होंने इस प्रकरण को छुपाने में मदद की और तथ्य को दबा दिया गया। अब चूंकि जांच में कनिष्ठ बाबू पर गलत पाए गए हैं, तो इसमेें उस वक्त नियुक्ति करने के लिए फाइल चलाने वाले बाबू भी सवालों के घेरे में आ गए हैं।
बीएसए कृपा शंकर वर्मा का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है। कनिष्ठ लिपिक से एक सप्ताह में साक्ष्य सहित जवाब मांगा गया है, इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।