बदायूं। जिले में पशुधन पर संकट है। पशुओं की खुरपका और मुंह पका बीमारी से मौत हो रही है। कई इलाकों में गलाघोंटू से भी पशु दम तोड़ रहे हैं। दरअसल, पशु चिकित्सा विभाग को जिले में 13.86 लाख पशुओं को खुरपका, मुंहपका रोधी वैक्सीन लगाने का लक्ष्य मिला था। 10.72 लाख पशुओं को वैक्सीन दी गई। बाद में टीकाकरण अभियान रोक दिया गया। बाद में पशुओं को दी गई वैक्सीन केंद्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला में अधोमानक पाई गई है। ऐसे में अब पशु तेजी से खुरपका और मुंहपका की जद में आ रहे हैं।
पशुओं को हर साल नवंबर-दिसंबर और मार्च-अप्रैल में खुरपका, मुंहपका बीमारी से बचाने के लिए एफएमडी (फुट एंड माउथ) वैक्सीन दी जाती है। इसके अलावा साल में एक बार गलाघोंटू बीमारी से बचाने के लिए मानसून के सीजन से पहले मई-जून में हेमोरेजिस सेफ्टीसेमिया वैक्सीन दी जाती है। इस बार जिले में खुरपका, मुंहपका वैक्सीन देने के लिए 13 लाख 86 हजार 950 पशुओं का लक्ष्य रखा गया था। पशु चिकित्सा विभाग ने नवंबर-दिसंबर में टीकाकरण अभियान शुरू किया, वैक्सीन अधोमानक होने के कारण अभियान को बीच में ही रोक दिया गया। हालांकि, इस दौरान जिले में 10 लाख 72 हजार से ज्यादा पशुओं को टीका लगाया भी जा चुका था।
दरअसल, केंद्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला ने एफएमडी वैक्सीन की जांच की तो यह मानकों पर खरी नहीं पाई गई। ऐसे में जिन पशुओं का टीकाकरण हुआ था उनके साथ टीकाकरण से छूटे पशुओं को भी संक्रामक खुरपका और मुंहपका बीमारियां घेर रही हैं। जिले में लगातार पशुओं की मौत हो रही है। पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जहां भी पशुओं के बीमार होने की सूचना मिल रही है वहां टीम को भेजा जा रहा है। मार्च से टीकाकरण अभियान प्रस्तावित है। अभी वैक्सीन की नई खेप नहीं मिली है।
पशुओं को खुरपका और मुंहपका बीमारी से बचाने के लिए दी जाने वाली एफएमडी वैक्सीन को केंद्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला ने जांच में अधोमानक पाया था। जिले में 13.86 लाख पशुओं को टीका लगाया जाना था, इनमें 10.72 लाख पशुओं को टीका लगा दिया गया था। वैक्सीन अधोमानक होने के कारण टीकाकरण अभियान रोक दिया गया था। अब मार्च से टीकाकरण प्रस्तावित है, अभी वैक्सीन की नई खेप नहीं मिली है। - डॉ. एके जादौन, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी