बदायूं। रोजगार मेला मंगलवार को सुबह 10 बजे से पांच बजे तक चलना था, लेकिन मात्र चार घंटे में ही मेला सिमट गया। इस दौरान 120 में 30 युवक-युवतियों का ही चयन हो पाया। जबकि, 18 को कंपनी ने कमीशन पर रखा है। रोजगार मेले में दस कंपनियां बुलाईं गईं थीं, लेकिन सिर्फ छह ही पहुंच सकीं। एक कंपनी के प्रतिनिधि दोपहर दो बजे के बाद आए। तब तक युवा जा चुके थे।
नेकपुर स्थित जिला सेवायोजन कार्यालय में लगे रोजगार मेले में 120 युवक और युवती पहुंचे। इस दौरान 48 युवक-युवतियों का ही चयन विभिन्न कंपनियों के लिए हुआ। 18 ऐसे युवक-युवती भी शामिल हैं, जिन्हें लखनऊ की ब्राइट फ्यूचर हर्बल आर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड ने कमीशन एजेंट के रूप में चुना है। वे हर्बल पौधे और हर्बल दवाओं की बिक्री कराएंगे तो 10 से 30 फीसदी तक ही कमीशन पाएंगे। इस तरह से मात्र 30 का ही चयन हुआ।
बता दें कि आचार संहिता लागू होने की वजह से तीन महीने से कोई मेला नहीं लगा था। तीन महीने के इंतजार के बाद यह पहला आयोजन हुआ था। इंटस बायोटेक हेल्थ केअर प्राइवेट लिमिटेड ने तीन, हिंदुस्तान ऑटो पार्ट्स लिमिटेड ने 17, गोफास्ट आर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड ने दो व एसएचएन सॉफ्टिंग साल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड ने आठ आवेदकों को रोजगार के लिए चुना।
शिवशक्ति बायोटैक प्राइवेट लिमिटेड ने आवेदकों से बातचीत की, लेकिन उपयुक्त लोग नहीं मिल सके। एकेसी वर्ल्ड प्राइवेट कंपनी के प्रतिनिधि दोपहर में दो बजे के बाद आए। तब तक मेला समाप्त हो चुका था। अधिकतर आवेदक लौट गए थे। रोजगार कार्यालय में लिपिक आंकड़े फीड कर रहे थे और सेवायोजन अधिकारी का कक्ष खाली पड़ा था।
रोजगार की उम्मीद में ओवरएज हो रहे छोटेलाल
उझानी क्षेत्र के पारवाला निवासी छोटेलाल ने बताया कि उनके ही गांव के निवासी बीएल वर्मा अब केंद्रीय मंत्री हैं, उम्मीद है कि सरकारी नौकरी के लिए रिक्तियां निकलेंगी और उन्हें नौकरी मिलेगी। वैसे तो वह 26 साल के हो गए हैं। चार साल से नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं ग्रेटर नोएडा की एक कंपनी में चयन हुआ था, लेकिन वेतन महंगाई हिसाब से कम होने की वजह से नौकरी छोड़नी पड़ी।
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पालनगर के अशोक कुमार को लौटा दिया
पाल नगर के अशोक कुमार दो बजे पहुंचे, तब तक अधिकतर कंपनियों के लोग जा चुके थे। लखनऊ की ब्राइट फ्यूचर हर्बल आर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड प्रतिनिधि मोहम्मद हाशिम मिले। अशोक ने जब उन्हें बताया कि वह शहर में ही जॉब चाहते हैं तो उन्होंने मना कर दिया। बोले-उनकी कंपनी हर्बल दवाएं बनाती हैं और गांव में बिक्री की गुंजाइश है, इसलिए वह लौट गए।
संगम, अंजुम व राहुल को भी नहीं मिल सकी जॉब
बड़ी उम्मीद के साथ रोजगार मेले में आईं इस्लामगंज की संगम मिश्रा और अंजुम कुमारी को जॉब नहीं मिली। दोनों स्नातक हैं। इसी तरह से प्रीति बिहार के राहुल कुमार भी निराश होकर लौट गए। राहुल ने बताया कि वह कंप्यूटर प्रोफेशनल हैं और 6000 रुपये महीने में काम करते हैं यहां आए थे कि दस हजार रुपये महीने की नौकरी मिल जाए, लेकिन लौटना पड़ा रहा है।