'यह अधिकारी की लड़ाई'
अटेवा जिला संरक्षक डॉ. राकेश प्रजापति ने कहा कि यह लड़ाई अपने अधिकार की लड़ाई है। जिसे हम सबको मिलकर के प्राप्त करना है। पुरानी पेंशन को प्राप्त करने के लिए सभी कर्मचारी सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करने का कार्य करेंगे। यदि सरकार इस पर भी नहीं मानती है, तो जन आंदोलन करने का भी कार्य अटेवा करेगा। अटेवा जिला प्रभारी अनिल यादव ने कहा ये अटेवा के संघर्ष की ताकत है, जो दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक और राजस्थान में पुरानी पेंशन लागू हो चुकी है। सभी कर्मचारी इसी तरह अटेवा का साथ देते रहे, तो आने वाले समय में पूरे देश में पुरानी पेंशन लागू होगी।
जिला महामंत्री लल्लू सिंह प्रजापति ने कहा कि यह लड़ाई केवल कर्मचारी की नहीं है, बल्कि पूरे समाज की लड़ाई है। क्योंकि समाज के व्यक्ति का कोई ना कोई परिवारीजन कर्मचारी अवश्य है। जिला कोषाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह ने कर्मचारियों से अटेवा के अधिक से अधिक सदस्य बनने पर जोर दिया। जिला संगठन मंत्री निर्भान सिंह ने संघे शक्ति अर्थात संगठन में ही शक्ति पर बल दिया और सभी संगठन को संगठित होने के लिए कहा।