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फलों में सिर्फ केला...दूध में होवे खेला

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बरसुआ प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को नहीं मिला दूध। संवाद - फोटो : BADAUN
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उझानी (बदायूं)। सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील वितरण को अफसर बिल्कुल भी संजीदा नहीं हैं। ऐसा ही मामला सोमवार को सामने आया। ब्लॉक क्षेत्र के अधिकतर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सब्जी-रोटी तो बनी लेकिन कुछ विद्यालयों में जहां फल बंटे, उनमें सिर्फ केला था तो दूध के साथ तो मानो ‘खेला’ हो गया।
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मानकपुर प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे मील के इतर दाल-रोटी बनी। शिक्षिका की मौजूदगी में बच्चों ने फल मिलने की बात तो कही लेकिन मौके पर टोकरी नजर नहीं आने पर जवाब मिला कि फल खरीदने के लिए प्रधान ने किसी को बाजार भेजा है।
रौली में बच्चे सब्जी-रोटी खाते नजर आए। जमरौली प्राथमिक विद्यालय के बच्चों दूध मिलने इन्कार कर दिया। प्रधानाध्यापिका बेबी फरीदा बोलीं- प्रधान जिले से बाहर हैं, सो फलों में केला अगले दिन बांट दिया जाएगा।
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जमरौली से ही थोड़ा आगे ब्लॉक क्षेत्र के ही गांव बरसुआ के संविलियन विद्यालय में बच्चों को सब्जी-रोटी थोड़ी देर से जरूर मिली लेकिन दूध को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष अरविंद दीक्षित बोले कि फिलहाल कमी चल रही है। आने वाले दिनों में दूध भी मुहैया कराया जाएगा। बरसुआ के संविलियन विद्यालय को पिछले दिनों ही बिल्सी से भाजपा विधायक हरीश शाक्य ने गोद लिया है।
जिन विद्यालयों में बच्चों को मौसमी फलों समेत अब तक एक बार भी दूध नहीं मिला है, उनकी फेहरिस्त में शामिल सिरसौली विद्यालय में एक छात्र ने प्रधानाध्यापक संजीव गंगवार के सामने ही पौष्टिक आहार की पोल खोल दी। यहां बच्चों को मौजूदा शैक्षिक सत्र में न तो केला मिला है और न ही दूध नसीब हो पा रहा है।
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आम महंगा.. केला सस्ता, तो इसी को खिलाओ
प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को केला इसलिए खिलाया जा रहा है क्योंकि बाजार में उसका रेट करीब 20-25 रुपये दर्जन है। मौसमी फलों में अच्छा आम 40 रुपये प्रति किलो से कम नहीं मिल रहा। चार-पांच आम ही एक किलो वजन के हो जाते हैं। ऐसे में एक आम करीब 10 रुपये का पड़ता है। अमरूद का सीजन हो तो केला से भी सस्ते में जुगाड़ हो जाता है। रही बात दूध की तो 55 रुपये प्रति किलो का दूध खरीदकर बच्चों को पिलाने का प्रयास ही नहीं किया जाता।
यहां बता प्राथमिक विद्यालय के बच्चे को सौ ग्राम तो जूनियर के छात्र-छात्र को डेढ़ सौ ग्राम दूध देने का नियम है।
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रसोई में चूल्हे पर पकाया खाना
संविलियन विद्यालय बरसुआ में तीनों रसोइया चूल्हे पर खाना पकाती मिलीं। प्राथमिक और जूनियर के बच्चों को मिलाकर संख्या करीब साढ़े तीन सौ है। रसोइया महिलाएं रोटी सेंकते समय पसीने से तरबतर थीं। रोजाना ही उन्हें ऐसे ही दाल या फिर सब्जी बनाने के बाद रोटियां सेंकनी पड़ती हैं। पूछने पर हेडमास्टर और शिक्षकों का तर्क था कि जल्दी की खातिर ऐसा करना पड़ता है।
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ब्लॉक क्षेत्र में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मिड-डे मील मेन्यू के अनुरूप भोजन और पौष्टिक सामग्री मुहैया कराई जा रही है। मौसमी फल भी बांटे जाते हैं। दूध भी पिलाया जाता है लेकिन कुछ स्थानों पर दूध को लेकर दिक्कत सामने आई है। वहां दूध के नाम पर धनराशि भी अवमुक्त नहीं की गई है।
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- शशांक शुक्ला, खंड शिक्षाधिकारी
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