बदायूं। जिले में राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य से लेकर शिक्षकों तक कई पद खाली चल रहे हैं। ऐसे में शिक्षा को बेहतर करने के दावे सिर्फ कागजों पर पूरे होते दिखाई दे रहे हैं। हालात ये हैं जिले में 14 राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (जीआईसी/जीजीआईसी) में 13 में प्रधानाचार्य नहीं है। ऐसे में यहां पर कार्यवाहक को जिम्मेदारी दी गई हैं। कई पद शिक्षकों के भी खाली चल रहे हैं।
माध्यमिक शिक्षा किसी भी युवा के जीवन में अहम भूमिका निभाती है। इन युवाओं को सही सांचे में ढालने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर होती है लेकिन जिले के राजकीय कॉलेजों का हाल ये है कि अधिकतर में मौजूदा शिक्षकों के सापेक्ष काफी सीटें खाली हैं, हालांकि इनको पिछले दो साल से भरने का प्रयास किया गया है, लेकिन जिले में अब भी कई स्कूलों में सीटें खाली चल रही है।
जिले में 14 राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज हैं, जिसमें से राजकीय इंटर कॉलेज नाधा में केवल प्रधानाचार्य तैनात हैं, इसके अलावा शहर में चल रहे राजकीय इंटर कॉलेज, राजकीय कन्या इंटर कॉलेज समेत 13 अन्य कॉलेज में प्रधानाचार्य के पद खाली चल हैं, हालांकि यहां पर कार्यवाहक के तौर पर प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसी तरह जिले के इंटर कॉलेजों में प्रवक्ता के 143 पद स्वीकृत हैं। इसमें से महज 16 ही तैनात हैं, बाकी 127 पद खाली चल रहे हैं।
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पांच राजकीय हाईस्कूल में ही प्रधानाध्यापक
जिले में 21 राजकीय हाईस्कूल हैं। इन स्कूलों में 16 प्रधानाध्यापक तैनात हैं, जबकि सदर तहसील क्षेत्र में स्थित कादरबाड़ी, मामूरगंज, गुरगांव और बिसौली तहसील क्षेत्र में स्थित नौली हरनाथपुर में बने राजकीय हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक की तैनाती नहीं है, यहां पर भी कार्यवाहक के तौर पर काम चलाया जा रहा हैं। यही हाल सहायक अध्यापकों का है। जिले में 270 पद प्रवक्ता के है, इनके सापेक्ष 139 सहायक अध्यापक ही कॉलेजों में तैनात है। बाकी 131 पद खाली चल रहे हैं।
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दो सालों में मिले सौ शिक्षक
राजकीय हाईस्कूल व इंटर कॉलेज में पढ़ाई को बेहतर तरीके से कराने के लिए दो सालों में जिले के लिए 100 शिक्षक मिले हैं। इसमें 2020 में 65 शिक्षक विभाग को मिले थे, जबकि 2021 में महज 35 शिक्षक ही मिल सके। ऐसे में सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं होती दिखाई दे रही हैं।
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जिले में शिक्षकों के कुछ पद रिक्त चल रहे हैं। इसके बारे में कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, ताकि शासन स्तर से जिले को और शिक्षक मिल जाएं।
-डॉ. प्रवेश कुमार, डीआईओएस