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ज्योतिबा फुले ने महिला शिक्षा पर दिया था विशेष जोर : डॉ. स्मिता

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बदायूं। महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर राजकीय महिला महाविद्यालय में ऑनलाइन विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. स्मिता जैन ने ज्योतिबा फुले के बारे में विस्तार से बताया। कहा-उन्होंने महिलाओं और अनुसूचित जाति के उत्थान के लिए अनेक कार्य किए।
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डॉ. जैन का कहना था कि महिलाओं को शिक्षा प्रदान करने के वह प्रबल समर्थक रहे। पुणे में विद्यालय की स्थापना की। महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयत्नशील होने के कारण ब्रिटिश सरकार ने इन्हें शिक्षण के आद्य जनक की उपाधि प्रदान की।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. मनोज कुमार ने भी महात्मा ज्योतिबा फुले के संपूर्ण जीवन पर छात्राओं से चर्चा-परिचर्चा की। कार्यक्रम का संचालन कर रही डॉ. वंदना ने बताया कि महात्मा फुले ने महिलाओं के उत्थान के लिए अनेक कार्य किए। इस मौके पर आकांक्षा शर्मा, अनामिका पटेल, फरहाना ने भी विचार रखे। धारणा, हर्षिता, फरहीन, कारिया, अलीशा, स्वाति आदि छात्राओं ने भाग लिया।
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बिल्सी में मनाई गई ज्योतिबा फुले की जयंती
बिल्सी। महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर सर्वप्रथम भगवान बुद्ध एवं फुले जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया गया। उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए डॉ. बीपी मौर्य ने कहा कि फुले जी का मूल उद्देश्य स्त्रियों को शिक्षा का अधिकार प्रदान करना, बाल विवाह का विरोध, विधवा विवाह का समर्थन करना रहा। राकेश शाक्य ने कहा कि ज्योतिबा फुले ने अपना सम्पूर्ण जीवन स्त्रियों को शिक्षा प्रदान कराने में, स्त्रियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में व्यतीत किया। इस मौके पर हरिओम शाक्य, मनवीर सिंह, टिंकू शाक्य, मनोज शाक्य, धर्मेंद्र मौर्य आदि मौजूद रहे। संवाद
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