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पेपर लीक मामला : जिले के 57 परीक्षा केंद्रों के व्यवस्थापक बदले

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बदायूं। बलिया में पेपर लीक होने के बाद माध्यमिक शिक्षा बोर्ड स्तर से लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। इसके तहत अब परीक्षा केंद्र बनाए गए वित्तविहीन स्कूलों में तैनात व्यवस्थापकों को बदलने के निर्देश दिए गए हैं। इन केंद्रों पर अब तक उन्हीं कॉलेजों के प्रधानाचार्य को व्यवस्थापक बनाया गया था पर अब जिले के 57 परीक्षा केंद्रों पर बदलाव करते हुए राजकीय कॉलेजों के प्रधानाचार्यों व प्रवक्ताओं को व्यवस्थापक बनाया गया है।
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यूपी बोर्ड परीक्षा में शिक्षा माफिया हावी हो गए हैं। यही वजह है कि बलिया में अंग्रेजी का प्रश्नपत्र लीक हो गया था। बदायूं के केंद्र पर प्रश्नपत्र की सील खुली मिली। वहीं बदायूं में चित्रकला के पेपर में दो मुन्ना भाई असली छात्रों के स्थान पर परीक्षा देते हुए पकड़े गए थे। ऐसा ही मामला अन्य जिलों में भी पकड़ में आया है। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से बोर्ड परीक्षा के नियमों में बदलाव किया गया। दरअसल, अब तक वित्तविहीन स्कूलों में केंद्र व्यवस्थापक उसी विद्यालय के प्रधानाचार्य को बनाया गया था। अब इसमें परिवर्तन करते हुए वहां पर राजकीय कॉलेजों के प्रधानाचार्यों / प्रवक्ताओं को इन वित्तीय विहीन स्कूलों में केंद्र व्यवस्थापक बनाया गया है। इसको लेकर माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से डीआईओएस को निर्देश दिया गया है। निर्देश मिलने के बाद डीआईओएस ने सभी प्रधानाचार्यो को इस बारे में अवगत करा दिया है। इसके तहत अब वित्तीविहीन स्कूलों के प्रधानाचार्यों को वहां अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापक के तौर पर रखा जाएगा।
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परीक्षा कक्ष की चाबी दी जाएगी स्टेटिक मजिस्ट्रेट को
बदायूं। शासन ने निर्देश दिए है कि जिस कक्ष में प्रश्न पत्र रखे हों। उन प्रश्न पत्रों के कक्षों को भी प्रश्न पत्र निकालकर तुंरत सील कर दिया जाए। साथ ही चाबी केंद्र व्यस्थापक पर रहेगी। रविवार को नियम में फिर बदलाव किया गया है। इसके तहत अब सील कक्ष की चाबी स्टेटिक मजिस्ट्रेट को दी जाएगी। डीआईओएस ने कहा कि ऐसे में अब स्टेटिक मजिस्ट्रेट को परीक्षा शुरू होने से करीब एक घंटा पहले संबंधित केंद्रों पर पहुंचना पड़ेगा।
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57 वित्त विहीन स्कूलों के केंद्र व्यस्थापकों को बदला गया है। उनके स्थान पर राजकीय कॉलेजों के प्रधानाचार्य/ प्रवक्ता को केंद्र व्यस्थापक बनाया गया है। वहां पहले जो केंद्र व्यस्थापक थे, उनको अतिरिक्त केंद्र व्यस्थापक बनाया गया है। - डॉ. प्रवेश कुमार, डीआईओएस
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