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अनुदेशकों की तैनाती स्कूलों में...काम कर रहे दफ्तरों में

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बदायूं। परिषदीय स्कूलों में बेहतर शिक्षा की व्यवस्था हो, इसके लिए शासन स्तर से जूनियर हाईस्कूलों में खेल, कम्प्यूटर आदि विषयों के अनुदेशकों की तैनाती की गई, लेकिन बहुत से अनुदेशक ऐसे हैं जो विभागीय दफ्तरों के साथ ही तहसीलों में बाबुओं का काम कर रहे हैं। ऐसे में शासन की मंशा पर पूरी तरह से पानी फिर रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले दिनों इन अनुदेशकों का अटैचमेंट खत्म भी कर दिया गया, लेकिन कुछ समय बाद फिर से वे उन्हीं स्थानों पर तैनात हो गए।
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उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी होने की वजह से जिन स्कूलों में सौ से अधिक छात्र पंजीकृत थे, वहां पर शासन स्तर से मानदेय पर कम्प्यूटर, गृह विज्ञान, कला आदि के अनुदेशक लगाए गए। शासन की मंशा थी कि शिक्षा के साथ बच्चों के खेलों पर भी ज्यादा ध्यान दिया जाए। कुछ समय तक तो अनुदेशकों की तैनाती स्कूलों में रही। उन्होंने बच्चों को अपने विषय से संबंधित सिखाया भी, लेकिन जैसे-जैसे समय बढ़ा, वैसे-वैसे अनुदेशकों को बेसिक शिक्षा कार्यालय में कम्प्यूटर आदि काम के लिए लगा लिया गया। खंड शिक्षाधिकारियों ने भी अपने काम के लिए अनुदेशकों को स्कूलों से हटाकर दफ्तर में अटैच कर लिया। यहीं नहीं कुछ अनुदेशक तहसील दफ्तरों में तैनात कर दिए गए जो अपने मूल कार्य को छोड़ बाबू का काम निपटा रहे हैं। अब हाल ये है कि कुछ अनुदेशक ऐसे भी हैं जो अब स्कूलों में दोबारा नहीं जाना चाहते। वे दफ्तरों में ही काम करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। जब अनुदेशकों के दफ्तरों में लगे होने की खबर विभागीय अधिकारियों तक पहुंची तो सभी को उनके स्कूल में भेजने के आदेश जारी हुए। साफ कहा गया कि कोई अनुदेशक दूसरे दफ्तर में अटैच नहीं रहेगा। इस आदेश का कुछ दिनों तक असर भी दिखाई दिया था, लेकिन अब फिर से उन्हें दफ्तरों में लगा दिया गया है।

675 अनुदेशकों की हुई थी भर्ती
शासन के निर्देश पर जिन विद्यालय में छात्रों की संख्या 100 से अधिक थी, ऐसे करीब 400 स्कूलों में इन अनुदेशकों की तैनाती है। 675 अनुदेशकों में करीब 238 अनुदेशक कंप्यूटर टीचर के रूप में नियुक्त किए गए थे। इनमें से लगभग आधे अनुदेशक अपने मूल काम को छोड़कर, तहसील, बीएसए विभाग, डायट, ब्लॉक पर अटैचमेंट पर तैनात कर दिए गए थे। इनमें से भी करीब सौ अनुदेशक आज भी इन्हीं स्थानों पर काम कर रहे हैं।
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प्रशासन की ओर से कुछ अनुदेशकों की मांग की गई थी, ऐसे में उनकी जरूरत के हिसाब से मुहैया कर दिया गया। जैसे ही काम खत्म हो जाएगा, उन्हें वापस बुला लिया जाएगा।
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-रामपाल सिंह राजपूत, बीएसए
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