बदायूं। शहर में जरूरतमंदों की मदद के लिए शुरू की गई ‘नेकी दी दुकान’ और आरआरसी सेंटर की पहल अब लापरवाही का शिकार होती जा रही है। दानदाताओं की नेक भावना से लाए गए कपड़े अब सड़क पर गंदगी की भांति बिखरे पड़े हैं, जिन्हें वाहन कुचल रहे हैं। इनकी हालत देखकर ऐसा लगता है जैसे कोई व्यवस्था ही नहीं है।
परशुराम चौक के पास प्रशासन की पहल पर आरआरसी सेंटर खोला गया था। उद्देश्य था कि जिन लोगों के पास अतिरिक्त या पुराने कपड़े हों, वे यहां दान कर सकें ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग इन कपड़ों का उपयोग कर सकें। अब यह केंद्र अव्यवस्था का अड्डा बन गया है। कपड़े सड़क पर पड़े रहते हैं, जिन्हें राहगीर या वाहन कुचलते हुए निकल जाते हैं। कुछ कपड़े तो धूल में सने हुए हैं।
यही हाल शहर के ओवरब्रिज के नीचे बनी ‘नेकी दी दुकान’ का भी है। शुरुआत में यह जगह मानवता और सेवा की मिसाल मानी जा रही थी। कई समाजसेवी और युवा संगठन यहां कपड़े व अन्य जरूरत का सामान लेकर आते थे, लेकिन अब वहां की स्थिति दयनीय हो चुकी है। खुले में पड़े कपड़े बारिश और धूप से खराब हो चुके हैं। कई बार लोग कपड़े फेंककर चले जाते हैं, जबकि कोई देखने वाला नहीं होता कि वे व्यवस्थित रखे जा रहे हैं या नहीं।
बहुत अच्छा कदम था, अब अफसोस होता है
शहर के जवाहरपुरी निवासी संदीप गुप्ता ने बताया कि शुरुआत में यह बहुत अच्छा कदम था, जरूरतमंद लोग बिना झिझक यहां से कपड़े ले जाते थे। अब स्थिति देखकर अफसोस होता है। प्रशासन को यहां सफाई और देखरेख के लिए कोई कर्मचारी तैनात करना चाहिए, जिससे पुराने और अनुपयोगी कपड़ों को समय-समय पर हटाने की व्यवस्था भी की जाए। ताकि असली मंशा पूरी हो सके।
कपड़ों के ढेर से बदबू तक आने लगी है
शहर के नेकपुर निवासी महेश सिंह ने बताया कि कपड़ों के ढेर से बदबू तक आने लगी है। इससे आसपास के क्षेत्र में राहगीरों को परेशानी होती है। कुछ असामाजिक तत्व इन कपड़ों के साथ खिलवाड़ करते हैं, जिससे दान की भावना का मजाक बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन इन दान केंद्रों पर नियमित निगरानी रखे।
क्या है इनको खोलने का मकसद
‘नेकी दी दुकान’ आरआरसी सेंटर का विचार जरूरतमंदों की सहायता के लिए शुरू किया गया था। इसमें दानदाता अपने पुराने या अनुपयोगी कपड़े, जूते, खिलौने और घरेलू सामान रख देते हैं। जिन्हें गरीब और असहाय लोग बिना किसी शुल्क के ले सकते हैं। शुरुआत में इस पहल को लोगों ने खूब सराहा था, लेकिन अब देखरेख के अभाव में स्थिति बिगड़ती जा रही है। समाजसेवियों का कहना है कि यदि इसकी निगरानी व सफाई व्यवस्था बेहतर कर दी जाए, तो यह जगह फिर से मानवता की मिसाल बन सकती है।
सड़क पर कपड़े नहीं फैलने चाहिए। इनको व्यवस्थित तरीके से रखवाया जाएगा। ताकि जिस व्यक्ति को जरूरत हो वह यहां से कपड़े ले जा सके। -अरुण कुमार, एडीएम प्रशासन
आरआरसी सेंटर के बाहर सड़क पर पड़े कपड़े। संवाद