बैंक की हितकारी योजनाओं की उनको जानकारी नहीं, बिचौलियों के चंगुल में फंसने को मजबूर
भाजपा ने केंद्र की सत्ता पाने के लिए लोगों को अच्छे दिन लाने का सपना दिखाया था, लेकिन किसानों के अच्छे दिन अब तक नहीं आए। केवल भाजपा ही नहीं सत्ता पाने के लिए चुनाव के समय नई-नई योजनाएं बनाकर किसानों को बड़े-बड़े सपने दिखाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद किसानों की तरफ कोई मुड़कर भी नहीं देखता है। ऐसे में अपनी जरूरतें पूरी करने में किसान बैंक से कर्ज लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं। गौरतलब है कि बैंक की हितकारी योजनाओं की जानकारी आम किसानों तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में किसान बिचौलियों के चंगुल में फंस जाते हैं।
-------------------------
चुनाव के समय नेताओं ने दिखाए थे सपने
विधानसभा चुनाव के समय नेताओं ने किसानों को बिजली, पानी, खाद, बीज समेत किसान हित की तमाम कल्याणकारी योजनाओं के लुभावने सपने दिखाए थे, लेकिन भाजपा की सरकार बनने के बाद से अब तक इन योजनाओं से किसानों को कोई लाभ नही मिल सका है। विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिले में आए तो किसानों के हित में लंबे चौड़े भाषण दे गए। किसानों को उम्मीद थी कि भाजपा की सरकार बनेगी तो उनके भी अच्छे दिन आ जाएंगे। मगर सरकार का सिस्टम सही न होने से उनके लिए अच्छे दिन की शुरुआत नही हो पाई। सर्किल रेट से लेकर खेती तक किसानों को सुविधाएं नही मिल पा रही हैं। शायद यही वजह है किसान आज तक कर्ज में डूबे हैं। जिले में करीब चार लाख किसानों में दो लाख से ज्यादा कर्ज में डूबे हुए है। इन पर बैंकों का करीब सात-आठ सौ करोड़ से ज्यादा रकम का कर्ज है। शायद ये रकम भी चुकाना पाना इनके बस की बात नहीं है। कृषि विभाग से लेकर बैंकों तक दलालों की फौज लगी है। किसान परेशान हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। सबसे बड़ी शर्म की बात है कि इन हालात में फंसे किसानों के आंसू पोंछने की बजाय नेता किसानों को खुशहाहल बताकर अपने कार्य प्रणाली का गुणगान कर रहे हैं।
जिले में राष्ट्रीय बैंकों और अन्य बैंकों की 189 शाखाएं हैं। इन पर जिले के करीब 193317 किसानों का सात सौ करोड़ रुपये बकाया है । वही इसमें सहकारिता विभाग के 38 हजार किसानों का 80 करोड़ रुपये का कर्ज है। कर्जमाफी योजना में करीब 86 हजार के आसपास किसानों का एक लाख तक का फसली कर्ज यानी 40 % माफ होने की उम्मीद है। लेकिन इस बात से 60% किसान संतुष्ट नहीं हैं। वहीं दो लाख से 5 लाख तक का कर्ज वाले 40% से ज्यादा किसान 31 मार्च से पहले अपना कर्ज नही चुका पाते है। ऐसे में किसान चक्रवृद्धि ब्याज के दल-दल में फंसता चला जाता है। नतीजा यह होता है कि कर्ज से मुक्ति पाने के लिए किसान अपनी जमीन बेचता है और बच्चों का पेट पालने के लिए मजबूर हो जाता है।
अधिकतर किसानों की फसल अप्रैल में होती है। शायद यही वजह है कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर कर्ज नहीं चुका पाते है। नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही बैंक अपने लोन पर किसान से सात प्रतिशत की दर से पुराने ब्याज पर चक्रवृद्धि ब्याज भी लेते है।
----
क्या कहते हैं किसान
कुलदीप सक्सेना, खेड़ा जलालपुर का यदु शुगर मिल पर 75 हजार रुपये है। अब तक भुगतान नहीं हुआ है। दो लाख का कृषि लोन बकाया है। सरकार किसानों के लिए कुछ नहीं कर रही है। किसान परेशान है। कई योजनाओं की जानकारी भी नहीं है।
---
रमेश चंद्र, ग्राम-सिचौली बैंक ऑफ बड़ौदा, बिसौली का तीन लाख केसीसी (कृषि ऋण) बकाया है। उपज अच्छी नही होने के कारण लोन लिया था। भाजपा की सरकार बनी तो सोचा कर्ज माफी से कुछ राहत मिलेगी। मगर एक लाख का कर्ज माफ होने से कोई फायदा नही होने वाला।
-----
बैकुंठी लाल मिश्रा, ग्राम बोन्द्री ने ढाई लाख रुपया कर्ज सन 2013 में सर्व यूपी ग्रामीण बैंक उझानी से लिया। इसमें केवल एक लाख माफ होगा, दो लाख का कर्ज बकाया रह जाएगा। किसानों के लिए समस्याएं बढ़ रही हैं। इस सरकार ने भी किसानों को धोखा दिया है। जमीन बेचनी पड़ेगी।
---
सरबन सिंह, ग्राम मल्ललहपुर पर एक लाख रुपया गन्ने का बकाया है। स्टेट बैंक से एक लाख का कर्ज है । जो माफ नहीं होगा चूंकि 5 एकड़ से ज्यादा जमीन है बैंक वसूली के नोटिस भेज रही है। गन्ना बकाया न मिलने पर सूदखोरों से तीन रुपया सैकड़ा प्रति महीना की भारी दर पर कर्ज लेकर बैंक कर्ज चुकाना पड़ेगा, नहीं तो जमीन कुर्क हो जाएगी।