बदायू। राजकीय मेडिकल कॉलेज में लापरवाही की हद हो गई है। प्रमुख सचिव ने बैठकों में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को हेपेटाइटिस बी और सी के वायरल लोड की जांच कॉलेज की लैब में कराने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके जांच के लिए सैंपल अभी भी लखनऊ भेजे जा रहे हैं। वहीं, पिछले दो माह में हेपेटाइटिस के तीन मरीजों की जान भी जा चुकी है।
जिले में हेपेटाइटिस बी के 250 व सी के 3800 सक्रिय मरीज हैं, लेकिन ज्यादातर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसका मुख्य कारण है कि वायरल लोड की जांच रिपोर्ट आने में दो महीने तक लग जा रहे हैं। पिछले दिनों प्रमुख सचिव ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को लखनऊ में हुई बैठक में फटकार भी लगाई थी, बावजूद इसके जांच नहीं की जा रही है।
हेपेटाइटिस के मरीज की जिला अस्पताल में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, ब्लड की जांच, हेपेटाइटिस बी व सी के साथ ही एचआईवी की जांच की जाती है। जांचों से यह पता लग जाता है कि मरीज संक्रमित है या नहीं। मरीज के शरीर में कितने वायरस हैं, इसके लिए वायरल लोड की जांच होना आवश्यक होता है। इन जांच के बाद ही दवा की डोज तय की जाती है, लेकिन सुविधा होने के बाद भी समय से इलाज शुरू नहीं हो पा रहा है।जिला अस्पताल में सैंपल लिया जाता है। महीने में एक बार सैंपल को जांच के लिए लखनऊ भेजा जाता है।
बहुत आवश्यक है वायरल लोड की जांच
हेपेटाइटिस रोग के नोडल अधिकारी डॉ. एसएम कमल का कहना है कि वायरल लोड की जांच रिपोर्ट देखे बिना मरीज का इलाज शुरू नहीं किया जा सकता। हेपेटाइटिस के मरीज के शरीर में कई कैटेगरी पाई जाती हैं। यह संक्रमण खतरनाक होता है। समय पर इलाज न मिलने या फिर गलत डोज खाने से मरीज की मौत भी हो जाती है। इसलिए वायरल लोड की जांच बहुत ही महत्वपूर्ण है। लखनऊ से दो महीने से पहले रिपोर्ट नहीं आ पा रही है। नोडल अधिकारी ने बताया कि लखनऊ में प्रमुख सचिव की बैठक में कई बार राजकीय मेडिकल के प्राचार्य को फटकार लग चुकी है। शासन ने निर्देश भी दे दिए हैं बदायूं के राजकीय मेडिकल कॉलेज में ही वायरल लोड की जांच होनी चाहिए।
हेपेटाइटिस बी और सी के वायरल लोड की जांच की पूरी व्यवस्था लैब में है। जांच किट की आपूर्ति न होने की वजह से जांच नहीं हो पा रही है। जल्द ही वायरल लोड की जांच शुरू करा दी जाएगी। -डॉ. अरुण कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज