बदायूं। सरकार लाखों रुपये खर्च कर रही है कि ज्यादा से ज्यादा गर्भवतियों का प्रसव सरकारी अस्पतालों में हो, लेकिन जिले में सरकार की यह पहल परवान नहीं चढ़ पा रही है। वित्तीय वर्ष 2023-24 की अपेक्षा वित्तीय वर्ष 2024-25 में सरकारी अस्पतालों में 577 प्रसव की गिरावट आई है। वहीं निजी अस्पतालों में 764 की बढ़ोतरी हुई है।
सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों में प्रसव को लेकर बहुत जोर दिया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण स्तर पर सीएचओ, एएनएम और आशा की तैनाती कर दी है, ताकि गर्भवती को कोई दिक्कत हो तो वह संबंधित कर्मचारी से संपर्क कर अस्पताल पहुंच सकती हैं। सरकार इन पर हर माह 10 लाख रुपये से ज्यादा का खर्च कर रही है, लेकिन सरकार की योजना को पंख नहीं लगा पा रहा है। हाल यह है कि साल दर साल सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव की संख्या घट रही है। इसका सीधा फायदा निजी अस्पताल उठा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1,03,566 प्रसव का लक्ष्य था। इसके सापेक्ष 58,681 प्रसव सरकारी अस्पतालों में हो पाए थे। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1,16,496 प्रसव के सापेक्ष 58,104 प्रसव सरकारी अस्पतालों में हुए थे। दोनों वित्तीय वर्ष में हुए प्रसव के आंकड़ों को देखा जाए तो 577 प्रसव घट गए हैं। इसका लाभ निजी अस्पताल के संचालकों ने खूब उठाया। वित्तीय वर्ष 2023-24 के सापेक्ष 2024-25 में प्रसव की संख्या 764 बढ़ गई है।
हर सप्ताह मनाया जाता पीएमएसए डे
सरकार के निर्देश पर सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर हर सप्ताह प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है। इसमें डॉक्टर गर्भवतियों का परीक्षण करतीं और अगर उन्हें अल्ट्रासाउंड की जरूरत होती है तो उसके लिए भी निशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए टोकन देती हैं। यह अल्ट्रासाउंड निजी सेंटर में कराया जाता है। इसके अलावा खून की कमी वाली गर्भवतियों को आयरन सुक्रोज चढ़ाया जाता है। यह भी व्यवस्था निशुल्क रहती है।
संस्थागत प्रसव में हुई मामूली बढ़ोतरी
- वित्तीय वर्ष 2023-24 में 91,053 प्रसव और वित्तीय वर्ष 2024-25 में 91,240 संस्थागत प्रसव हुए हैं। दोनों आंकड़ों की तुलना की जाए तो 187 प्रसव की संख्या बढ़ी हुई है।
इन कारणों से सरकारी अस्पतालों में घट गए प्रसव
-स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा गांव में प्रसव के लिए जागररूकता का अभाव
-सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर लोगों का विश्वास कम होना
-गर्भवतियों को मिलने वाले लाभ के बारे में जानकारी न होना
-सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी
- सरकारी अस्पतालों में प्रसव की संख्या घटने की जानकारी नहीं है। यह जानकारी नोडल अधिकारी डॉ. सनोज मिश्रा के पास मिलेगी। प्रसव बढ़ाने के लिए लगातार स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देशित किया जा रहा है। - डॉ. रामेश्वर मिश्रा