'विराज को जघन्य अपराध की मिली सजा'
डेढ़ साल के आरव की पटककर हत्या करने वाले अभियुक्त विराज को शुक्रवार को फिरोजाबाद के जिला जज की कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। जब यह सूचना अभियुक्त के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के शेखपुर स्थित घर में रहने वाले भाइयों को मिली तो परिवार में सन्नाटा छा गया। मां गुमसुम हो गईं। विराज के बड़े भाई ने कहा कि उसने जो जघन्य अपराध किया, उसकी तो सजा उसे मिलनी ही थी। विराज की मां को सजा के बारे में नहीं बताया गया है।
विराज के पिता विशेंद्र पाठक का पहले ही निधन हो चुका है। वह मंदिर के पुजारी थे। सभी भाई पिता के पैतृक कार्य पूजा-पाठ और शादी-विवाह करने का काम करते हैं। अभियुक्त चार भाइयों में सबसे छोटा है। विराज को फांसी की सजा होने के बाद उसके बड़े भाई मुनीश पाठक ने बताया कि उसने जो जघन्य अपराध किया, उसे उसकी सजा मिली।
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मुनीश ने बताया कि विराज का दिमागी संतुलन सही नहीं था, जिसका इलाज चल रहा था। वह नशे का भी आदी हो गया था। वर्ष 2018 में दो मंजिल से गिरने के बाद उसका दिमागी संतुलन और बिगड़ गया था। इसी स्वभाव के कारण एक बार मुझे भी चोट पहुंचाने की कोशिश की थी। बात-बात कर गुस्सा करने की वजह से उसकी शादी नहीं कराई, जबकि रिश्ते कई आए थे। बरेली से काफी लंबा इलाज चला, लेकिन उसके स्वभाव में कोई बदलाव नहीं हुआ।
पड़ोसी भी रहे खामोश
अभियुक्त विराज को फांसी की सजा मिलने की सूचना पर पड़ोसियों से बातचीत करने का प्रयास किया तो उन्होंने भी कुछ बोलने से मना कर दिया। हालांकि उन्हें यह पता था कि विराज को फांसी की सजा क्यों हुई है।
मां को नहीं बताया फांसी के बारे में
बड़े भाई मुनीश ने बताया कि फैसले के बारे में बीमार मां को पूरी जानकारी नहीं दी है। अभी ये जानकारी देंगे तो उनकी तबीयत और बिगड़ सकती है। मां से मिलने की बात पर तीनों भाइयों ने साफतौर पर इन्कार कर दिया। बातचीत के दौरान मां घर से निकलकर गेट तक आईं। इस बीच मुनीश ने मां से कहा कि क्यों परेशान होती हो, केवल 14 साल की सजा हुई है। इस पर मां रोने लगी। इसी बीच बड़े भाई राजीव मां को लेकर घर के अंदर चले गए।