सर्व शिक्षा अभियान में धन ठिकाने लगाने के साथ बंदरबांट का खेल चल रहा है। आरोप है कि कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में छात्राओं के स्वास्थ्य परीक्षण के नाम पर ही चेक काट दिए गए। यह चेक निजी अस्पताल के नाम काटे जाने की चर्चा है। आरोप है कि स्वास्थ्य परीक्षण के नाम पर प्राइवेट अस्पताल को जिम्मेदारी दे दी गई। हालांकि विभागीय अफसर आरोपों को निराधार बता रहे हैं।
बीते दिनों हुई वार्डनों की मीटिंग में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चला। फर्म स्वामियों द्वारा जबरन माल फेके जाने का विरोध करने के साथ औने-पौने दाम में सामान भिजवाने की शिकायत दर्ज कराई। कहा, जो जरूरत का सामान है वह तो पहुंचाया नहीं जा रहा और नहीं है उसे जबरन भेजा जा रहा है। इस शिकायत पर कार्रवाई करना तो दूर उल्टा ठेकेदारों को पेमेंट कर दिया गया। सूत्रों की माने तो क्लोजिंग के चलते एडवांस चेक तक काट दिए गए। वहीं अब स्वास्थ्य परीक्षण के नाम पर बंदरबांट करने की चर्चा सामने आ रही है। सूत्र बताते हैं कि तीन महीने पहले हुए आदेश के बावजूद स्वास्थ्य परीक्षण सुचारू ढंग से नहीं हुआ। आरोप है कि इसके नाम ही प्रत्येक के हिसाब से 74 हजार का चेक भी काटने की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि विभागीय अधिकारी सभी आरोपों को निराधार बता रहे हैं। इस संबंध में जब सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी जगदीश सिंह से बात करनी चाही तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। बीएसए कृपा शंकर वर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य परीक्षण लगातार होते रहते हैं। ऐसा कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, फिलहाल दिखवाया जाएगा।