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अच्छे कर्म करो, भगवान भी करते हैं कर्मयोगी की मदद

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बिल्सी। श्री सिद्धपीठ बालाजी धाम के तत्वावधान में नगर के ज्वाला प्रसाद जैन स्कूल में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी रामचंद्राचार्य ने गोपी प्रेम के मर्म को समझाया।
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उन्होंने कहा कि बृज की गोपियों का श्रीकृष्ण के प्रति विशुद्ध प्रेम है। वह पूर्णत: निर्विकार हैं जो ज्ञान और भक्ति से परिपूर्ण हैं। भक्ति के बिना ज्ञान शुष्क ही रहता है जबकि ज्ञान के अभाव में भक्ति में भटकाव आ जाता है। गोपियां दोनों गुणों की चरमावस्था पर हैं इसीलिए श्रीकृष्ण और उनका प्रेम अनन्यतम और उच्चतम स्तर का है।
स्वामी जी ने कहा कि भक्तों के सारे कृत्य भगवान को केंद्र में रखकर होते हैं। जो काम प्रभु की प्रसन्नता के लिए किए जाता है वही पुण्य है। सभी सांसारिक दायित्वों को भगवान की आज्ञा मानकर निर्लिप्त भाव से करना ही कर्मयोग है।
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निष्काम कर्म करने वाले कर्मयोगी भगवान को अतिशय प्रिय हैं। स्वामी जी ने कथा में कन्हैया की बाल लीलाओं का मनोहारी वर्णन करके श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
इस मौके पर महंत मटरुमल शर्मा महाराज, शांति देवी, प्रदीप शर्मा, ओजित शर्मा, संजीव शर्मा, राजीव शर्मा, यश भारद्वाज ,राजीव शर्मा ,श्रीकांत मिश्रा, दीपक बाबा, यश शर्मा, पुष्कीन माहेश्वरी, आचार्य धुव, देव वार्ष्णेय आदि मौजूद रहे। संवाद
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