दातागंज के बिहारीपुर गांव में फसल में भरा पानी। संवाद
दातागंज। गंगा एक्सप्रेस-वे पर निर्माणाधीन पुल के कर्मचारियों ने रामगंगा पर अस्थाई बांध बनाकर नदी का बहाव रोक दिया। इससे वहां पर जलभराव हो गया और फिर नौनी टिकन्ना व बिहारीपुर गांव के किसानों की डेढ़ सौ बीघा से अधिक की फसल पानी में डूब गई। गुस्साए किसानों ने एक्सप्रेस-वे के कर्मचारियों को घेर लिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसानों का समझाकर शांत कराया। इसके बाद प्रधान ने किसानों के साथ एसडीएम से मुलाकात की तो उन्होंने नुकसान के आंकलन की रिपोर्ट लेखपाल से मांगी।
रामगंगा की कटरी के गांव नौनी टिकन्ना और बिहारीपुर के किसानों ने खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, खीरा, तोरई, लौकी की फसलें लगाई है। वर्तमान में फसल करीब-करीब बाजार में बिक्री के लिए तैयार है। बुधवार की रात में बिहारीपुर गांव के पास गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माणाधीन पुल के पास कर्मचारियों ने अस्थाई बांध बनाकर रामगंगा के बहाव को रोक दिया। इसकी वजह से निचले स्थानों की फसल में रामगंगा का पानी भर गया।
सुबह किसान खेत पहुंचे तो देखा कि फसले डूबी हैं। आक्रोशित किसानों ने एक्सप्रेस-वे के कर्मचारियों को घेर लिया और उन्हें भला बुरा कहने लगे। घबराए कर्मचारियों ने तुरंत पुलिस को फोन करके मौके पर बुला लिया। पुलिस ने कर्मचारियों को डांट-डपट कर पानी के लिए रास्ता बनाने को कहा और समझा बुझाकर किसानों को भी शांत कर दिया। बाद में नौनी गांव के प्रधान चंद्रपाल के नेतृत्व में किसानों ने एसडीम धर्मेंद्र कुमार सिंह से मुलाकात की।
प्रधान ने बताया कि एसडीएम ने लेखपाल को भेज कर किसानों के नुकसान का आंकलन करने का आश्वासन दिया है। किसान अनिल गिरी, मुकेश गिरी, नन्हे पटेल, जब्बार, लल्लन, श्यामा चरण, श्याम पाल, जोगिंदर, मुकेश, पूसे और त्रिमोहन आदि की फसलें खराब हुई हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादातर किसानों ने दो हजार बीघा की पेशगी पर खेत लिया है और अपनी मेहनत छोड़ दें तो करीब दो हजार प्रति बीघा की लागत आती है। खेत में अगर पानी भरा रहता है तो फसल सड़ जाएगी और पानी निकलने के तुरंत बाद सूख जाएगी। कर्मचारियों कि इस गलती से किसान परेशान हैं।