अपनी गृहस्थी बचाने को विवाहिता ने नशेड़ी पति और उसके परिवार की लंबे समय तक यातनाएं सहन की, लेकिन जब उसकी आबरू से खिलवाड़ हुआ, तब उसने विद्रोह कर दिया। मायके पक्ष के सहयोग से दरिंदों के चंगुल से निकली विवाहिता ने अब कानून का सहारा लिया है।
कस्बा के एक गांव की लड़की की शादी छह साल पहले थाना क्षेत्र के ही नगरिया खुर्द गांव के संपन्न परिवार में हुई थी। अन्य विवाहिताओं की तरह तमाम सपने संजोए महिला ससुराल आ गई। ससुराल में कुछ समय बाद ही उसके सपनों का महल ढह गया। पति कई तरह के नशे का लती निकला। ससुराल वाले भी दहेज को लेकर प्रताड़ित करने लगे। लंबे समय तक शारीरिक और मानसिक आघात सहती रही। एक बार सब्र का बांध टूट गया तो मायके वालों को खबर कर दी। वह लोग उसे बुलाकर मायके ले आए। इसी बीच नशे की हालत में पति ने अपने शरीर में आग लगा ली। उसी समय ससुराल पक्ष से कई लोग उसके मायके में आए और भविष्य में किसी तरह का उत्पीड़न न होने का विश्वास दिलाकर उसे पुन: ससुराल ले गए। हालांकि मायके वाले ससुराल भेजने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन गृहस्थी को बचाने की खातिर वह ससुराल आ गई। जल्द ही सेवा करके जख्मी पति को ठीक कर लिया, लेकिन कुछ दिन बाद फिर प्रताड़ना का दौर चालू हो गया। पति नशे की हालत में अमानवीय व्यवहार करने लगा। हद तो तब हो गई जब पति ने अपने सामने ही अपने बहनोई के आगे उसे परोस दिया। आबरू पर आंच आते ही वह विद्रोही हो गई। किसी तरह सूचना भेजकर मायके वालों को बुला लिया। उन्हीं के सहयोग से नारकीय जीवन से निकलकर पुलिस के पास आ गई। सबक सिखाने के लिए उसने बलात्कारी बहनोई समेत पति सास-ससुर, ननद समेत छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।