उसावां क्षेत्र का एक सजायाफ्ता मुजरिम के नाम न सिर्फ लाइसेंसी शस्त्र चल रहा है, बल्कि वह एक स्कूल में शिक्षामित्र के पद पर अभी भी बरकरार है। उसकी लाइसेंसी बंदूक मामा लेकर घूमता है। पुलिस जानकार भी कार्रवाई नहीं करती। अब इस मामले को जिलाधिकारी के समक्ष उठाया। डीएम ने लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए हैं।
उसावां के वार्ड नंबर सात में रह रहे संग्राम सिंह ने डीएम को पत्र प्रेषित कर अवगत कराया है कि एक मुकदमे में वह वादी हैं। इस वाद में चंद्रपाल सिंह पुत्र सामल सिंह यादव, नत्थू सिंह पुत्र मान्धाता सिंह और राघवेंद्र सिंह पुत्र चंद्रपाल सिंह हाल निवासी ग्राम नगरिया अभय, उसावां को धारा 307, 447 के तहत आरोपी बनाया गया था। अपर न्यायाधीश अष्टम की अदालत से जज अनिल कुमार सेकेंड ने राघवेंद्र सिंह को दस वर्ष की सश्रम सजा और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी।
संग्राम सिंह का आरोप है कि राघवेंद्र जेल में है, लेकिन उनके नाम का शस्त्र लाइसेंस उसका मामा खुलेआम लेकर घूमता है। इससे उनको जान-माल का खतरा है। यही नहीं राघवेंद्र का नाम शिक्षामित्र में भी चल रहा है। उसे पद से नहीं हटाया गया है। संग्राम ने डीएम से मांग की है राघवेंद्र का शस्त्र लाइसेंस निरस्त कराकर उसे शिक्षामित्र पद से भी बर्खास्त किया जाए। डीएम ने लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए हैं।