बिनावर थाने के गांव घट बेहटी में हुए दरोगा हत्याकांड के आरोपी नन्हे ने शनिवार को स्पेशल जज डकैती विकास कुमार की कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। नन्हे ने सरेंडर तब किया, जब डीआईजी आशुतोष कुमार पुलिस ऑफिस का वार्षिक निरीक्षण कर रहे थे। पुलिस ने उसकी रिमांड के लिए अर्जी तक नहीं दी। वहीं, एक अन्य आरोपी ऋषिपाल अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
बिनावर थाने के गांव घट बेहटी में 22 जून की रात बदमाशों और पुलिस की मुठभेड़ हो गई थी। इसमें दरोगा सर्वेश यादव शहीद हो गए थे जबकि सिपाही प्रमोद घायल हो गया था। गोली लगने से घायल कल्लू यादव नाम के बदमाश को पुलिस ने दबोच लिया था। बाद में घायल कल्लू की अस्पताल में इलाज के दौरान शनिवार को मौत हो गई थी। उसके दो साथी नन्हे यादव पुत्र रामविलास निवासी गांव रसूलपुर थाना बिनावर और ऋषिपाल यादव फरार हो गए थे। दोनों की गिरफ्तारी को एसपी सिटी अनिल यादव के नेतृत्व में चार सीओ और पुलिस की 12 टीमें लगाई गईं।
पुलिस को चकमा देकर नन्हे यादव शनिवार को स्पेशल जज डकैती कोर्ट पहुंचा। यहां उसने सरेंडर कर दिया। इस बारे में पुलिस को पता लगा तो महकमे में हड़कंप मच गया। इंस्पेक्टर कोतवाली मनोज कुमार, एसओजी टीम भी कोर्ट पहुंच गई। यहां पुलिस उससे ज्यादा पूछताछ नहीं कर सकी। पेशी के बाद कोर्ट ने नन्हे को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। गौर करने वाली बात यह है कि पुलिस ने उसकी रिमांड तक नहीं मांगी है।
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घट बेहटी का राजा यादव है कल्लू गैंग का सदस्य
बदायूं। कोर्ट में हाजिर होने के बाद जेल जाते वक्त नन्हें से जब मीडिया ने घटना के बारे में बात की तो उसने कई बार बयान बदले। पहले कहा कि वारदात वाले दिन वह कल्लू के साथ नहीं था। बाद में बताया की घट बेहटी गांव का राजा यादव भी गिरोह का सदस्य है। 22 जून की रात कल्लू यादव और ऋषिपाल के साथ वह राजा के घर ही जा रहा था। कल्लू ने एक अन्य बदमाश का नाम पंडित बताया। कहा गिरोह में उसको पंडित नाम से ही जाना जाता है। बता दें कि अमर उजाला ने 23 जून को ही इस ओर इशारा करते हुए खबर प्रकाशित की थी कि ‘कोई तो है घट बेहटी में बदमाशों का मददगार’। जब उससे पूछा कि वह घटना के बाद से कहां रहा, तो वह फिर बयान से पलटा बोला, वारदात में वह शामिल नहीं था। उसने अखबार में अपना नाम पढ़ा तो उसे पता लगा। उसने कल्लू यादव से दोस्ती की बात स्वीकार की। कल्लू ने उसका नाम क्यों लिया? इस पर वह थोड़ा संभलने के बाद बोला, पेशबंदी के लिए।
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... तो घायल नहीं हुए थे बाकी दो बदमाश
बदायूं। मुठभेड़ के बाद पुलिस दावा कर रही थी कि फरार हुए दोनों बदमाश भी घायल हुए हैं। कोर्ट में पेश नन्हें के शरीर पर जख्म का कोई निशान नहीं था। बता दें कि मुठभेड़ के दौरान पुलिस की ओर से 10 राउंड और बदमाशों की ओर से करीब 25 राउंड फायरिंग हुई थी। तब पुलिस ने दावा किया था कि भागे बदमाश भी घायल हुए हैं, लेकिन ये दावा हवा हवाई निकला।
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एक नेता की सरपरस्ती में छिपा था नन्हे
शातिर शुक्रवार को भी सरेंडर करने पहुंचा था कोर्ट
मुखबिर तंत्र को धता बताकर कर दिया सरेंडर
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। बगल में छोरा...जगत ढिंढ़ोरा, ये कहावत फरार बदमाश नन्हें के बारे में सटीक सागित हुई। जिस शातिर नन्हें को पुलिस टीमें, सर्विलांस और एसओजी पूरे मंडल में तलाश कर रही थीं, वह अपने ही जिले के दातागंज इलाके में छिपा हुआ था। पुलिस के मुखबिर तंत्र को धता बताकर शुक्रवार को भी सरेंडर करने कोर्ट पहुंचा, लेकिन सरेंडर नहीं हो सका। शनिवार को वह इसमें कामयाब हो गया। वह तब, जब डीआईजी यहां दौरे पर आए हुए थे। इससे पुलिस की काफी किरकिरी हुई है।
मुठभेड़ में शामिल नन्हें और ऋषिपाल की गिरफ्तारी के लिए चार सीओ, पुलिस की 12 टीमों के साथ सर्विलांस और एसओजी जुटी थी। चार दिन में पुलिस टीमें दोनों की तलाश में कई जिलों की खाक छान चुकी है। किसी को भनक तक नहीं लगी कि वह दातागंज क्षेत्र में एक नेता की सरपरस्ती में रह रहा है। मीडिया से बात करते हुए नन्हें यादव ने स्वीकार किया कि 22 जून की रात ही वह दातागंज आ गया था। कल्लू यादव ने बयान में जब उसका नाम खोल दिया, तो उसने कोर्ट में सरेंडर का प्लान बनाया। बताया जाता है कि उसके सरेेंडर करने का पूरा खाका भी नेताजी के गुर्गों ने खींचा। शनिवार का दिन इसलिए मुफीद रहा कि इस दिन डीआईजी यहां आए थे। सो पूरा पुलिस का अमला उनकी अगवानी में लगा था। इसी का फायदा उठाकर नेता के कारिंदों ने उसे आसानी से कोर्ट में हाजिर करा दिया। पुलिस हाथ मलती ही रह गई।
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डीआईजी ने माना कल्लू ने बना रखा था गिरोह
बदायूं। डीआईजी आशुतोष कुमार ने मीडिया से बात करते समय स्वीकार किया कि जांच में पता लगा है कि कल्लू यादव ने गिरोह बना रखा था। उसके आधा दर्जन साथी पुलिस ने ट्रेस किए हैं। इनकी गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि जिस वक्त डीआईजी पुलिस लाइंस सभागार में मीडिया से बात कर रहे थे। उस वक्त नन्हें यादव कोर्ट में सरेंडर की तैयारी में लगा था।
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अगर पुलिस उसे कोर्ट में पेश करती तो रिमांड की अर्जी डाली जाती। आरोपी ने खुद सरेंडर किया है। वह न्यायिक अभिरक्षा में हैं। अब कोर्ट के नियमानुसार उसको रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।
-मनोज कुमार सिंह, इंस्पेक्टर/विवेचक, कोतवाली