फूंक-फूंक कर अफसरों ने रखा कदम
भूख हड़ताल संबंधी सूचना जेल प्रशासन ने सुबह करीब आठ बजे प्रशासन को दे दी थी। जब तक पुलिस और प्रशासन के बड़े अफसर जेल पहुंचे असंतोष पूरी जेल में फैल चुका था। करीब नौ बजे कुछ अफसर फोर्स के साथ जेल पहुंचे। स्थिति को देखते हुए वे अंदर गोल घर से आगे न बढ़ सके। बाद में फोर्स ने जब मोर्चा संभाल लिया तो ही बंदियों और कैदियों से बात हो पाई।
मंगलवार को जेल समेत पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। जेल में पहले हेलमेट और बॉडी प्रोटेक्टर के साथ भारी तादाद में पीएसी को भेजा गया। करीब दो घंटे तक यह सब चलता रहा। बाद में बाकी के अफसर अंदर गए। दो घंटे तक बंदी और कैदी कोई बात करने को राजी नहीं हुए। उनकी मांग सांसद को बुलाने की थी। जब सांसद प्रतिनिधि अवधेश यादव, विधायक आशीष यादव जेल पहुंचे। उन्होंने सांसद के व्यस्त शेड्यूल को बताया तो बंदी और कैदी आरोपी अफसरों के निलंबन को लेकर मुखर हो गए। बंदियों ने जेल में घटिया खाना मिलने की भी शिकायत की।
जेल में स्थिति पूरी तरह से सामान्य है। सुरक्षा की दृष्टि से फोर्स को बुलाया गया था। बंदियों और कैदियों की कुछ मांगे थीं। उन पर विचार किया जा रहा है। जायज मांगों को पूरा कराया जाएगा।
-अनिल यादव, प्रभारी एसएसपी
नौ घंटे तक छावनी बना रहा पूरा इलाका
नौ घंटे तक जेल समेत आसपास का पूरा इलाका छावनी बना रहा। कोतवाली, सिविल लाइंस, उझानी, सहसवान, कादरचौक, उघैती, बिल्सी, बिनावर, कुंवरगांव, वजीरगंज, उसहैत, मूसाझाग, मुजरिया आदि थानों के फोर्स के साथ सीओ सिटी वंशराज यादव, सीओ उझानी जेएस पाटनी, सीओ दातागंज श्योराज सिंह भारी तादाद में पुलिस और पीएसी के साथ घंटों यहां जमे रहे।
बॉडी प्रोटेक्टर के साथ फोर्स देखकर लोग सहमे
जेल समेत आस-पास के इलाकों में भारी तादाद में हेलमेट और बॉडी प्रोटेक्टर के साथ फोर्स को देखकर लोग भी सहम से गए। कोई कुछ समझ नहीं पा रहा था। फोर्स को देखकर राहगीर भी् ठिठक गए। वह भी लोगों से जानकारी लेते दिखे। जेल के वाहन पुलिस के वाहनों के काफिले के खड़े होने की वजह से कई बार यहां जाम की स्थिति भी बनी।
वाराणसी की बगावत से लिया प्रशासन ने सबक
पिछले दिनों वाराणसी जेल में बंदियों और कैदियों ने बगावत कर कई घंटे तक जेल पर कब्जा कर लिया था। संघर्ष में पुलिस और जेल प्रशासन के कई अफसर भी घायल हुए थे। मंगलवार सुबह जब प्रशासन के अफसरों को जिला जेल में बगावत की चिंगारी सुलगने की खबर मिली, तो उन्होंने इस स्थिति से चरणबद्ध ढंग से निपटने को कमर कस ली थी। वाराणसी कांड से सबक लेते हुए पुलिस-प्रशासन ने यहां कोई चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ी। वक्त तो लगा, लेकिन मामला सुलट गया।
बिना मुलाकात के ही बंदियों के परिवार लौटे
बदायूं। जेल में विस्फोटक स्थिति को देखते हुए चौकन्ने जेल प्रशासन ने मंगलवार को मुलाकातों के साथ बंदियों की पेशी पर भी ब्रेक लगा लिया। तमाम बंदियों और कैदियों के परिवार वाले मुलाकात को पहुंचे थे। मुलाकात न होने की वजह से उनको मायूस लौटना पड़ा।
जेल पर सुबह से ही फोर्स जुटना शुरू हो गया था। बंदियों और कैदियों के परिवार वाले भी मुलाकात को जेल पहुंचे लगे, जिन बंदियों की कोर्ट में पेशी की तारीख थी उनके परिवार वाले कोर्ट में इंतजार करते देखे गए। जब वह कोर्ट नहीं पहुंचे, तो परिवारी जानकारी जुटाने को जेल पहुंचे। तब उनको माजरा पता लगा। बाद में जेल पहुंचे मुलाकाती भी मायूसी के साथ बैरंग हो गए।