सहसवान के गांव हरदत्तपुर में हुई थी हत्या की वारदात
अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम ने हत्या के एक मुकदमे में तीन सगे भाइयों सहित चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्र कैद और 58 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।
हत्या की वारदात थाना सहसवान के गांव हरदत्तपुर में नौ जुलाई 2009 को हुई थी। 10 जुलाई को गांव के चौकीदार रामप्रसाद ने एक अज्ञात शव तिगरा गांव के पास पड़ा होने की सूचना थाने में दी। अगले दिन 11 जुलाई को वादी हरी सिंह ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसका पुत्र धर्मवीर नौ जुलाई को अपनी पत्नी और अपने रिश्तेदार रूप सिंह, प्रेम चंद्र, गंगा प्रसाद पुत्रगण भूदेव निवासीगण हरदत्तपुर और राजेश पुत्र कुंवरसेन के साथ बच्चे को दवा दिलाने सहसवान गया था। दवा दिलाने के बाद धर्मवीर ने अपनी पत्नी को घर भेज दिया। उससे यह भी कहा कि वह अपने चाचा की ससुराल महमूदपुर सौगान जा रहा है। वारदात से पहले गंगाप्रसाद का अपहरण हो चुका था। आरोपियों को अपहरण में धर्मवीर का हाथ होने का शक था। इसी रंजिश में आरोपियों ने उसके बेटे की हत्या कर दी। विद्वान न्यायाधीश ने पत्रावली का अवलोकन किया। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी एडीजीसी प्रेमबाबू और बचाव पक्ष के वकीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने रूप सिंह, प्रेमचंद्र, गंगा प्रसाद और उत्तराखंड के किच्छा निवासी राजेश कुमार को धर्मवीर की हत्या का दोषी करार देते हुए उम्र कैद के साथ सभी आरोपियों को 58 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।