अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान बिसौली में घटना
एसडीएम, सीओ की मौजूदगी में चल रहा था अभियान
अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान पुलिस ने ऐसी दबंगई दिखाई कि सदमे में हार्टअटैक से ओमकार नाम के अधेड़ खोमचे वाले की मौत हो गई। खाकी की दबंगई देख कर लोगों में गुस्सा भड़का, तो पुलिस बैकफुट पर आ गई और अभियान रोक दिया गया। यह सब एसडीएम बिसौली गुलाब चंद्र और सीओ राजवीर सिंह की मौजूदगी में हुआ। ओमकार के परिवार में कोहराम है। किसी अधिकारी ने उसके घर पर जाकर परिवार को सांत्वना देना भी जरूरी नहीं समझा।
बिसौली पुलिस ने गुरुवार को रोडवेज और इसके आस-पास के इलाकों में अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया। बिसौली रोडवेज के पास ही नगर के मोहल्ला गदरपुरा निवासी ओमकार (50) पुत्र प्रेम का समोसे का खोमचा लगा था। अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान पुलिस ने जमकर दबगई दिखाई। आरोप है कि ठेला-खोमचा वालों के साथ मारपीट भी की गई। कई ठेला-खोमचे पलट दिए। रोडवेज के पास समोसा का खोमचा लगाए ओमकार के साथ भी पुलिस ने अभद्रता की। इससे ओमकार सदमे में आकर जमीन पर गिर गया। आनन-फानन में आसपास के लोग उसे डॉक्टर के यहां ले गए। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने अतिक्रमण हटाओ अभियान स्थगित कर दिया। पुलिस की दबंगई से लोगों में गुस्सा है।
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मैं खुद अतिक्रमण हटाओ अभियान में शामिल था। ओमकार की मौत का अतिक्रमण हटाओ अभियान से कोई ताल्लुक नहीं है। अभियान के दौरान लोगों से पुलिस की मारपीट और अभद्रता करने की बात भी गलत है।
-गुलाब चंद्र, एसडीएम बिसौली
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कस्बे में पुलिस ने पहले से नहीं कराई कोई मुनादी
बिसौली। अतिक्रमण हटाओ अभियान से पहले पुलिस ने रोडवेज इलाके में कोई मुनादी नहीं कराई। अगर ऐसा हुआ होता, तो शायद पुलिस का काम आसान हो जाता और ओमकार की जान भी बच जाती।
ओमकार की पत्नी की करीब 10 साल पहले ही मौत हो चुकी है। उसके परिवार में 70 साल की बूढ़ी मां और दो बेटे हैं। इनमें एक की उम्र 17 और एक की 14 साल है। दोनों बेटे मंदबुद्धि होने की वजह से परिवार का पूरा बोझ ओमकार के कंधों पर ही था। उसकी मौत के बाद बूढ़ी मां और दो बेटों के पालन-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। घटना के बाद सभासद राधेश्याम ने ओमकार के परिवार के साथ एसडीएम गुलाब चंद्र से मुलाकात कर परिवार की मदद की मांग भी की, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई आश्वासन नहीं दिया गया।
अतिक्रमण के पीछे भी पुलिस की लापरवाही
बदायूं। यह भी एक सच है कि सड़कों पर अतिक्रमण के पीछे भी पुलिस की लापरवाही है। शुरूआत में पुलिस न सिर्फ अतिक्रमण को नजरअंदाज करती है, बल्कि ठेला-खोमचा वालों से वसूली भी की जाती है। उच्च अधिकारियों का दबाव पड़ने के बाद अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जाता है।
तहबाजारी के बाद भी नहीं मिलती जगह
बदायूं। नगर पालिका और नगर पंचायतें ठेला-खोमचा वालों से तहबाजारी वसूल करती हैं। इसके बावजूद नगरीय इलाकों में ठेला-खोमचा वालों के लिए कोई स्थान निर्धारित नहीं है। इसका खामियाजा अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान ठेला-खोमचा वालों को भुगतना होता है।