देवेश सिंह को मिला सिविल लाइंस थाने का चार्ज
राजपत्रित अधिकारियों का नाम मुकदमे में शामिल करने का मामला
कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर और अधिकारियों को गुमराह करने के मामले में एसएसपी चंद्रप्रकाश ने सिविल लाइंस एसओ नरेश यादव और हेड मोहर्रिर अयूब खां को निलंबित कर दिया है। अब इस मुकदमे की विवेचना क्राइम ब्रांच करेगी। सिविल लाइंस का चार्ज देवेश सिंह को सौंपा गया है।
कोतवाली के चाहमीर मोहल्ला निवासी वीरेंद्र धींगड़ा के बड़े बेटे सचिन पर हुए जानलेवा के मामले में सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के रहने वाले कारोबारी सुभाष बतरा ने कोर्ट में चार साल पहले हाईकोर्ट में एक रिट दायर की थी। इस मामले में कोर्ट ने सिविल लाइंस पुलिस को जिला अस्पताल के वर्तमान सीएमएस डॉ. आर.एस यादव, एसीएमओ डॉ हरपाल सिंह, डॉ. एके पाराशर को छोड़ व्यापारी वीरेंद्र धींगड़ा, उनकी पत्नी सीमा सहित आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। 15 सितंबर को सिविल लाइंस एसओ ने बिना किसी अधिकारी को सूचना दिए राजपत्रित अधिकारियों का नाम मुकदमे में शामिल कर दिया।
इसी के चलते सरकारी डॉक्टरों की फजीहत कर उनका नाम मुकदमे में शामिल और अधिकारियों को गुमराह करने के मामले में 16 सितंबर को एसएसपी चंद्रप्रकाश ने जांच बैठाई। एसपी सिटी कमल किशोर ने सीओ सिटी वीरेंद्र सिंह यादव को इसकी जांच दी। जांच रिपोर्ट शुक्रवार को एसएसपी चंद्रप्रकाश के पास पहुंची तो उन्होंने एसएसआई नरेश यादव और हेडमोहर्रिर अयूब खां को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
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कोट.....
कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर सरकारी डॉक्टरों का नाम मुकदमे में शामिल किया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर सिविल लाइंस एसओ नरेश यादव और हेड मोहर्रिर अयूब खां को निलंबित कर दिया है।
-चंद्र प्रकाश, एसएसपी