गेहूं खरीद के आखिरी दिन कर्मचारी कल्याण निगम के कुंवरगांव गेहूं खरीद केंद्र पर पहुंचे निगम के आरएम (डिपो) नरेंद्र प्रताप ने 170 बोरी गेहूं स्टाक में पाया। जबकि केंद्र प्रभारी दामोदर ने स्टॉक निल दिखा रखा था। आरएम ने जिला प्रबंधक की कोई भी दलील स्वीकार नहीं की। हालांकि जिला प्रबंधक का कहना था कि गेहूं रिजेक्ट कर लौटाया गया है। इस संबंध में आरएम ने कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन को भेजे जाने की बात कही।
दरअसल, गेहूं खरीद के दौरान इस बार कर्मचारी कल्याण निगम की सबसे अधिक शिकायतें रहीं। शासन स्तर तक शिकायतें पहुंचीं तो वहां से जांच के आदेश हुए। जांच निगम के आरएम (डिपो) नरेंद्र प्रताप को दी गई। खरीद समाप्ति के दिन उन्होंने यहां जांच शुरू की। बाद में बताया कि 170 बोरी गेहूं कुंवरगांव केंद्र पर रखा मिला, जबकि रिकार्ड निल था। इन बोरों में 85 क्विंटल करीब 1.25 लाख के गेहूं थे। पूछताछ में निगम के जिला प्रबंधक केएन जोशी ने कहा कि रिजेक्ट कर भेजे गए गेहूं हैं। रिजेक्ट होने का कोई लिखित प्रमाण वह नहीं दे सके। इसके अलावा उन्होंने खरीद का रिकार्ड देखा तो पता चला कि एक ही किसान के कई-कई बार खरीद और भुगतान का मामला भी सामने आया है।
शासन के निर्देश पर जांच की गई। जिला प्रबंधक ने जांच में कोई सहयोग नहीं किया। सब कुछ ओके बताते ररहे। किसानों से खरीद और भुगतान में भी गड़बड़ी है। रिजेक्ट गेहूं था तो उसका कोई लिखित आधार होना चाहिए था।
- नरेंद्र प्रताप, आरएम (डिपो), कर्मचारी कल्याण निगम
कुंवरगांव के क्रय केंद्र पर कोई गड़बड़ी नहीं है। पीसीएफ के गोदाम पर ये गेहूं गया था लेकिन बोरों की सिलाई मशीन की जगह हाथ से होने के कारण इसे गेहूं को वापस कर दिया गया था।
- केएन जोशी, जिला प्रबंधक, कर्मचारी कल्याण निगम