बदायूं। मुंगेर की पिस्टल बेचने वाले धंधेबाजों पर एक बार फिर शिकंजा कसने वाला है। स्थानीय पुलिस की लापरवाही और अनदेखी किए जाने के बाद इस मामले की विवेचना अब बरेली स्थानांतरित कर दी गई है। अब इसकी विवेचना वहां की क्राइम ब्रांच करेगी। इसके बाद उन धंधेबाजों पर शिकंजा कसना तय है, जिन्होंने स्थानीय अधिकारियों से सांठगांठ करके मामले को दबाने का प्रयास किया था।
कुछ माह पूर्व पुलिस की स्पेशल टीम ने शहर में छापा मारकर एक नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन के गन हाउस पर काम करने वाले नौकर समेत नौ लोगों को पकड़ा था। उनके पास से मुंगेर की आठ पिस्टल बरामद की र्गइं थीं। पूर्व चेयरमैन व उनके गन हाउस पर बैठने वाले बेटे को भी हिरासत में लिया गया था, लेकिन उन्हें छोड़ दिया गया। उनके अलावा प्रोफेसर कॉलोनी, कबूलपुरा और चंदौसी के मई गांव में रहने वाले एक व्यक्ति को भी हिरासत में लिया गया था। ये तीनों भी बिना कार्रवाई के थाने से छोड़ दिए गए थे। बताया जाता है कि स्थानीय पुलिस के कुछ लोगों ने इस मामले में धंधेबाजों से मोटा सौदा किया था। धंधेबाजों की पुलिस से मध्यस्थता कराने वाला शहर का एक प्रमुख व्यापारी नेता था। जब इसकी शिकायत एडीजी तक पहुंची तो जांच की कमान डीआईजी राजेश कुमार पांडेय को दे दी गई। अंदरखाने की जांच से पता चला कि इसमें कुछ स्थानीय अधिकारी धंधेबाजों से सांठगांठ किए बैठे थे।
वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने पर मामले की परतें एक-एक करके खुलने लगीं। पिछले दिनों एसएसपी अशोक कुमार का स्थानांतरण एसपी, क्षेत्रीय अभिसूचना इकाई के पद पर बरेली कर दिया गया। माना जा रहा है कि उन पर भी इसी कांड की गाज गिरी। अब इस मामले की विवेचना डीआईजी राजेश कुमार पांडेय ने क्राइम ब्रांच बरेली को स्थानांतरित कर दी है, जिससे असली धंधेबाजों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।
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जांच सही हुई तो नपेंगे असली धंधेबाज
क्राइम ब्रांच में विवेचना स्थानांतरित होने के बाद यह तो साफ हो गया है कि वरिष्ठ अधिकारियों को स्थानीय अधिकारियों की जांच पर भरोसा नहीं था। चूंकि इस मामले में धंधेबाजों का कुछ पुलिस अधिकारियों से मोटा सौदा हुआ था, इसलिए उनके नाम रातों रात निकाल दिए गए, जबकि खरीदारों को इसमें मोहरा बना दिया गया। खरीदार भी वे फांसे गए, जिनका उस रात पुलिस से सौदा नहीं हो पाया। डीआईजी के सख्त रुख और इस मामले में विशेष ध्यान देने के बाद यह माना जा रहा है कि अब असल धंधेबाज बच नहीं पाएंगे।
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सफेदपोशों के यहां लग रही हाजिरी
धंधेबाजों से सौदा होने के बाद जिले के कुछ आला पुलिस अधिकारियों ने इस मामले को दबाने की काफी कोशिश की थी, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आने पर वह ऐसा करने में सफल नहीं हो पाए। डीआईजी राजेश कुमार पांडेय के कड़े रुख के कारण इन अधिकारियों में अंदरखाने एक डर भी पैदा हो गया था। असल धंधेबाज भी यह सोचकर घबराने लगे थे, इसलिए उन्होंने सफेदपोशों के यहां चक्कर काटने शुरू कर दिए। अब विवेचना स्थानांतरित होने की बात जानकारी में आने पर ये धंधेबाज एक बार फिर सफेदपोशों की शरण में पहुंचने का प्रयास करने में लग गए हैं। पिस्टल खरीदने वालों में सत्तापक्ष के एक नेता का बेटा भी शामिल है। पुुलिस इस नेता के घर जाकर बड़े ‘अदब’ से दो पिस्टल लेकर आई थी। धंधेबाज इस नेता की आड़ लेकर भी खुद को बचाने को चक्कर चला रहे हैं।
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इस मामले की विवेचना बदायूं जिले से हटाकर क्राइम ब्रांच बरेली को दे दी गई है। अब नए सिरे से दोबारा जांच होगी और उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
- राजेश कुमार पांडेय, डीआईजी