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अभिलेख तैयार नहीं कर पाए थे घोटालेबाज, उससे पहले खुला मामला

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बदायूं। तीन करोड़ का खाद घोटाला करने वाले इतने निडर थे कि वो अपने अभिलेख भी तैयार नहीं कर पाए। सूत्रों की माने तो उन्हें विश्वास था कि दोबारा से परिवहन ठेकेदारी हथिया लेंगे। उन्होंने इसके प्रयास भी किए लेकिन शिकायत और पीसीएफ गोदाम से चोरी हुए एनपीके के 968 कट्टे के चक्कर में पूरी पोल खुल गई।
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सिविल लाइंस थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक तीन करोड़ के खाद घोटाले में मुख्य रूप से तीन आरोपी हैं। इनमें गोदाम प्रभारी जगतपाल, परिवहन ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारी शामिल हैं। सूत्रों की माने तो परिवहन ठेकेदारी लेने के चक्कर में अंदरखाने शिकायतें चल रही थीं। आरोपी ठेकेदार चाह रहा था कि उसे दोबारा से ठेकेदारी मिल जाए, लेकिन कुछ लोगों की नजरों में उसके खटकने से मामला बिगड़ गया। सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं से मिलीभगत के चलते उन्होंने परिवहन ठेकेदारी का टेंडर निरस्त कराने का पूरा प्रयास किया। उन्होंने शिकायत भी की लेकिन जब घोटाले की जांच शुरू हुई तो एक-दो लाख नहीं पूरे तीन करोड़ का खाद घोटाला निकला। सूत्रों के मुताबिक आरोपियों के कार्यकाल के दौरान आंवला से खाद आने का पूरा रिकॉर्ड मेनटेन रहा, परंतु खाद कहां ले जा रहे हैं, इसकी लिखापढ़ी नहीं कर पाए और न ही इस संबंध में विभाग को कोई कागजात सौंपा गया।

एफआईआर में नामजद आरोपियों ने आंवला से खाद लाने का पूरा रिकॉर्ड दिया है लेकिन गोदाम से खाद कहां गायब हो गई, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। हमने पुलिस टीम को कुछ रिकॉर्ड पहले दे दिया था, बाकी आज दे दिया।
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- अशोक कुमार शर्मा, जिला प्रबंधक, पीसीएफ
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