बदायूं। शहर के इंदिरा चौक स्थित रामा अस्पताल में पथरी के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर दंपती की लापरवाही से हुई महिला की मौत के मामले में नामजद डॉक्टर दंपती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली है। हाईकोर्ट ने दोनों डॉक्टरों को दो माह में अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया है। इधर पुलिस व प्रशासन से मदद की आस लगाए बैठे महिला के पति ने बच्चों सहित इच्छामृत्यु की मांग की है। उसने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है, साथ ही फेसबुक पर भी पोस्ट डाली है।
थाना सिविल लाइन क्षेत्र की मोहन कॉलोनी निवासी धीरेंद्र उपाध्याय 20 मई को अपनी पत्नी पूजा का पथरी का ऑपरेशन कराने डॉ. बीआर गुप्ता के रामा अस्पताल ले गए थे। वहां डॉ. अनमोल गुप्ता व उनकी पत्नी डॉ. पारुल गुप्ता ने ऑपरेशन किया, जिसमें घोर लापरवाही बरती गई, जिससे पूजा की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी पूजा के लिवर कटने और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हेेमरेज को मौत का कारण बताया गया। आरोप यह भी था कि पूजा को बेहोशी के इंजेक्शन की ओवरडोज दे दी गई थी। इसके बाद धीरेंद्र ने डॉक्टर दंपती के खिलाफ थाना सिविल लाइन में 21 मई को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दंपती रिपोर्ट को रद्द कराने को हाईकोर्ट इलाहाबाद गए, लेकिन हाईकोर्ट ने दंपती की रिपोर्ट रद्द करने की मांग को ठुकराते हुए आदेश दिया कि दोनों दो माह के भीतर अदालत में हाजिर हों और अपनी जमानत गैर इरादतन हत्या के मामले में कराएं।
इधर धीरेंद्र के दोनों बच्चों केे रो-रोकर बुरा हाल है। मां के बिछोह को वे सहन नहीं कर पा रहे हैं। पांच साल की बेटी सानवी और सवा साल का कार्तिक रात में नींद से जागकर मां को याद करते हैं। पुलिस और प्रशासन से मदद की आस लगाए धीरेंद्र ने इससे आहत होकर मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इच्छामृत्यु मांगी है। फेसबुक पर डाली गई पोस्ट पर भी उसने लिखा है कि जिन डॉक्टरों ने उसका हंसता खेलता परिवार बर्बाद कर दिया, उन पर कार्रवाई न होने से वह स्तब्ध है, अत: उसे अपने दोनों बच्चों सहित इच्छामृत्यु की अनुमति चाहिए।
...तो डॉक्टर ने क्यों नहीं लिए रुपये
बदायूं। धरती के भगवान कहे जाने वाले अधिकांश डॉक्टर अब भगवान नहीं रहे। वे अब रुपये के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं तो फिर ऐसा क्या हुआ जो पूजा की हालत बिगड़ने के बाद डॉक्टर ने अपने खर्च पर एंबुलेंस बुलाकर पूूजा को अपने एक कंपाउंडर के साथ आनन फानन बरेली भेज दिया। डॉक्टर को इतनी जल्दी थी कि कोई कागज तक उसके परिजनों को नहीं दिया गया। धीरेंद्र ने बताया कि डॉक्टर ने एक कंपाउंडर के खाते में रुपये ट्रांसफर कर दिए थे और उससे बरेली में खर्च करने को कहा गया था। केस बिगड़ने के बाद उनसे एक रुपया तक नहीं लिया गया।
परिजन बोले- न्याय मिलने तक लड़ेंगे लड़ाई
- पूजा के पति धीरेंद्र एलआईसी से जुड़कर प्राइवेट नौकरी करते हैं। बड़ेे भाई जीवेंद्र अधिवक्ता हैं। पिता का देहांत हो चुका है। मां सुधा वृद्घावस्था के दौर से गुजर रही हैं। बच्चों को जब मां की याद आती है तो दादी की गोद में जाकर लेट जाते हैं। मां सुधा बताती हैं कि ऑपरेशन को जाते समय पूजा नहाकर तैयार हुई थी। पूजा की थी और उसके बाद हंसी खुशी ऑपरेशन करवाने चली गई थी। किसी को नहीं पता था कि वे आखिरी बार उसका चेहरा देख रहे हैं। परिजन बोले- जब तक न्याय नहीं मिल जाता, वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।