मूसाझाग (बदायूं)। थाना क्षेत्र के ग्राम नवदिया उर्फ नवादा सुलरा में शुक्रवार सुबह मंदिर के नजदीक साधु का शव फंदे पर लटका मिला। इससे गांव के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर साधु के परिवार वाले और पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। परिजनों के मुताबिक साधु कुछ दिनों से अवसाद में चल रहे थे। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा है।
करीब 50 वर्षीय राजवीर उर्फ राजू गिरि मूसाझाग थाना क्षेत्र के ग्राम उतरना निवासी थे। करीब बीस साल पहले उन्होंने गृहस्थ आश्रम से संन्यास ले लिया था। उसी समय से अन्न भी नहीं खा रहे थे। दूध, सब्जी और फलहार करते थे। वह पांच भाइयों में सबसे बड़े थे। उनकी शादी नहीं हुई थी। संन्यास लेने के बाद उन्होंने अपने गांव में एक मंदिर बनवाया। बाद में उन्होंने नवादा सुलरा गांव में काले देव का मंदिर बनवाया और वहीं रहने लगे। भाई रामवीर और ग्रामीणों की माने तो राजू गिरि कुछ दिनों से अवसाद में चल रहे थे। उन्होंने लोगों से बोलना बंद कर दिया था। कोई बात होने पर भी बहुत कम बोलते थे। शुक्रवार सुबह लोगों ने उनका शव मंदिर से कुछ दूर 38 नंबर सरकारी ट्यूबवेल के पास पाकड़ के पेड़ पर फंदे पर लटका देखा। फंदे पर लाश लटकी देखकर ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। नवादा सुलरा के ग्रामीणों ने तुरंत उनके परिवार वालों और पुलिस को सूचना दी। जिस पर पुलिस मौके पर पहुंच गए। परिवार वाले भी रोते-बिलखते आ गए। उसके बाद पुलिस ने शव को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि राजू गिरि ने आत्महत्या क्यों की, अभी इसका पता नहीं चला है। लोग स्वयं उनके आत्महत्या करने से सन्न है। इस घटना के बाद से परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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ग्रामीणों की सूचना पर हम मौके पर पहुंचे थे। साधु का शव फंदे पर लटका मिला था। उनकी जेब से 6606 रुपये भी निकले। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बाकी उन्होंने यह कदम क्यों उठाया। इसकी जांच कर रहे हैं।
-ललित कुमार भाटी, एसओ मूसाझाग