बदायूं। सहसवान की जिस विवादित जमीन की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंची है, उसे भूमाफिया ने लाखों में खरीदकर करोड़ों में सौदा कर दिया। चूंकि जमीन के असली मालिक पाकिस्तान चले गए थे सो उनके रिश्तेदारों के नाम से फर्जीवाड़ा करते हुए उन्हें कुछ रकम पकड़ा दी गई और करोड़ों की जमीन को कब्जे में ले लिया गया। चर्चा है कि इस जमीन को केवल 28 लाख में खरीदकर बिल्सी के एक व्यक्ति को साढ़े तीन करोड़ में बेचा गया।
तत्कालीन डीएम कुमार प्रशांत ने इस मामले की गहन जांच कराई थी तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं थी, जिस पर डीएम ने उस समय 20 साल से वहां तैनात कानूनगो को हटाकर दातागंज भेज दिया था। इस मामले में आर-6 नामांतरण वही में एक ही मुकदमा संख्या पर दो बार अमल दरामद कर दिया गया। दूसरी बार कोई विक्रय पत्र भी प्रस्तुत नहीं किया गया। डीएम ने इसकी भी जांच के आदेश दिए थे, लेकिन समय के साथ इन सभी पर वक्त की धूल पड़ती गई। अब हालांकि एसडीएम सहसवान महिपाल सिंह मामले की जांच कराने की बात कह रहे हैं, लेकिन अभी उन्हें शिकायत का इंतजार है। उनका कहना है कि शिकायत मिलने पर वह कार्रवाई करेंगे।
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ये था मामला, पाकिस्तान चले गए थे जमीन के असली मालिक
यह जमीन 1949 में वहां के जमींदार अली अहमद खां की बताई जाती है। शिकायतकर्ता गुड्डू के अनुसार, उनके परिवार में उनकी पत्नी शमसुल निशां व दो बेटे अयूब अहमद व अमीर अहमद व तीन बेटियां खुदैजा बेगम, रजिया बेगम व जकिया बेगम थीं। इनमें रजिया को छोड़कर सभी लोग 1953-54 में पाकिस्तान चले गए थे। इसके बाद 1961 में यह संपत्ति राज्य सरकार की निष्क्रांत संपत्ति के रूप में दर्ज कर ली गई थी जबकि गाटा संख्या 78, 86/1 व 86/2 शत्रु संपत्ति के रूप में दर्ज कर ली गईं।
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कभी भारत नहीं आया और वरासत चढ़ गई
जमशेद गुड्डू का कहना था कि तत्कालीन चेयरमैन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए जमीन को अपनी हबीबा बेगम के नाम से दर्ज करा लिया। हबीबा बेगम की ईरान में मौत के बाद भूमाफिया की नजर इस बेशकीमती जमीन पर पड़ी तो उन्होंने उनके कनाडा में रह रहे बेटे नवेद और दिल्ली में रह रही बेटी इरम से संपर्क करके अपने नाम चढ़ा लिया। इसमें खास बात ये रही कि नवेद कभी भारत आया ही नहीं लेकिन उसकी वरासत चढ़ गई।
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सही से जांच हो तो आएंगे कई चौंकाने वाले नाम
शिकायतकर्ता का कहना है कि इस मामले में सत्ताधारी पार्टी से जुड़े नेता, सहसवान तहसील में कार्यरत रहे कुछ कर्मचारी समेत स्थानीय लोग शामिल हैं। इन लोगों का पूरा एक ग्रुप है जो जमीनों की खुर्दबुर्द में ही लगा रहता है। केवल यही नहीं बल्कि सहसवान में और भी कई जमीनों की खरीदफरोख्त में इन लोगों का ग्रुप शामिल है।