बदायूं। बैंक मैनेजर हत्याकांड में पुलिस की जांच शुरू हो गई है। हालांकि अब तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। परिवारवालों ने दो-एक दिन बाद कोतवाली पहुंचकर कार्रवाई कराने की बात कही है। कोतवाली पुलिस ने बुधवार को मैनेजर की नौकरानी और मकान मालिक से हत्या के संबंध में पूछताछ की।
सोमवार सुबह बैंक मैनेजर सैय्यद यूसुफ अली का शव उनके किराये के मकान में फंदे से लटका मिला था। उस दौरान पुलिस आत्महत्या मानते हुए कार्रवाई कर रही थी। कोतवाली पुलिस के होश तब उड़े जब मंगलवार सुबह उनके शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या बताई गई। इससे अधिकारियों ने तुरंत मैनेजर के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने के आदेश दिए लेकिन तब तक एंबुलेंस उनका शव लेकर बरेली पहुंच गई थी। उसे रास्ते से वापस बुला लिया गया। मैनेजर के भाई और भतीजे समेत पंचायतनामा में शामिल सभी लोगों को बुलाया और मैनेजर के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया लेकिन उसमें भी गला दबाकर हत्या की बात सामने आई।
बुधवार को पुलिस ने मैनेजर की नौकरानी और मकान मालिक को कोतवाली बुलाया। दोनों लोगों से अलग-अलग बिंदुओं पर पूछताछ की लेकिन वह कोई खास जानकारी नहीं दे सके। नौकरानी ने अपने पास एक चाबी होने की बात स्वीकारी है। कोतवाली पुलिस ने उनके अलावा अन्य लोगों से भी पूछताछ की है। बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों से भी जानकारी ली जाएगी।
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...तो जैसे पुलिस ने प्रवेश किया, वैसे ही निकले हत्यारे
बैंक मैनेजर की हत्या का मामला ऐसा उलझा है कि कोतवाली पुलिस भी चक्कर में पड़ गई है। इसमें एक ही अनुमान लगाया जा रहा है कि जैसे पुलिस मकान के अंदर दाखिल हुई थी, शायद वैसे ही हत्यारे निकलकर फरार हो गए। हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा।
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शुरुआत से लापरवाह रही पुलिस
बैंक मैनेजर हत्याकांड में कोतवाली पुलिस शुरुआत से ही लापरवाह रही। पुलिस ने पहले ही मान लिया था कि आत्महत्या का मामला है। इस मामले का दूसरा पहलू देखने की जरूरत ही नहीं समझी गई। इससे ज्यादा पोस्टमार्टम के दौरान सबसे ज्यादा लापरवाही बरती गई। एक बैंक मैनेजर के शव का पोस्टमार्टम कराने के दौरान भी वीडियोग्राफी नहीं कराई गई। जब अधिकारियों ने फटकार लगाई तो दोबारा पोस्टमार्टम ही नहीं कराया गया बल्कि वीडियोग्राफी भी कराई गई। संवाद