बदायूं। बृहस्पतिवार को सदर तहसील में भूलेख कार्यालय के अभिलेखागार में अभिलेख फाड़ते हुए दो लोग पकड़े गए। उनके पास से फाड़ा गया पेज नंबर 362 बरामद हुआ है। तहसील कर्मियों ने दोनों को पकड़कर कोतवाली पुलिस को सौंप दिया, जहां उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
मामला बृहस्पतिवार दोपहर साढ़े बारह बजे का है। भूलेख कार्यालय के रजिस्ट्रार कानूनगो दिवाकर सिंह पंचायत सहायक भर्ती के आवेदन पत्रों को देख रहे थे, तभी कादरचौक के गांव रमजानपुर निवासी महमूद अहमद और रजा अहमद एक अधिवक्ता के साथ भूलेख कार्यालय के अभिलेखागार में पहुंचे। उन्होंने वहां तैनात चेनमैन रवि कुमार को दस्तावेज का मुआयना कराने के लिए प्रार्थनापत्र की प्रतिलिपि दी। चेनमैन ने उनके गांव का रजिस्टर निकालकर दे दिया। तभी अधिवक्ता वहां से चले गए। महमूद और रजा अहमद रजिस्टर देखने लगे। जैसे ही उनको पेज नंबर 362 देखने को मिला, उनमें से रजा अहमद ने चेनमैन को बातों में लगा लिया और उसने महमूद ने इसे फाड़ लिया और मोड़कर नष्ट करने की कोशिश की।
लेखपाल कैलाश चंद्र गुप्ता ने सीढ़ियों से उतरते वक्त उनकी हरकत देख ली। शोर मचाकर कार्यालय के कर्मचारियों को एकत्र कर लिया। कर्मचारियों ने महमूद व रजा को पकड़ लिया। सूचना पर तहसीलदार करनवीर सिंह ने दोनों आरोपियों को तत्काल कोतवाली भिजवा लिया। इस संबंध में दिवाकर सिंह ने महमूद और रजा अहमद के खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। तहसीलदार करनवीर सिंह ने कहा कि इस मामले में रिपोर्ट दर्ज हो गई है।
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अभिलेखागार में हुई घटना में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर दो लोगों गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की विवेचना में सच्चाई सामने आ जाएगी। प्रशासन भी अपने स्तर पर जांच करेगा।
- दीपा रंजन, डीएम
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करोड़ों की संपत्ति हथियाना चाहते हैं आरोपी
बदायूं। सदर तहसील के अभिलेखागार में नामांतरण बही से अभिलेख फाड़ने का मामला तीन साल पहले दिवंगत रिटायर्ड सीनियर ऑडिटर अब्दुल कुद्दूस की करोड़ों की संपत्ति से जुड़ा है। इसमें अविवाहित ऑडिटर अपनी सगी बहन और देहरादून में कार्यरत सौतेले भाई को जिस संपत्ति की रजिस्टर्ड वसीयत कर गए थे, उसे भतीजी के ससुरालवाले हथियाने में लगे थे। अब रंगेहाथ पकड़े जाने से उनकी पैरवी दम तोड़ गई है, बल्कि खुद शिकंजे में आ गए हैं।
पूरा मामला रमजानपुर निवासी रहे स्वर्गीय अब्दुल कुद्दूस की संपत्ति से जुड़ा है। वह इलाहाबाद (प्रयागराज) के कार्यालय महालेखाकार में सीनियर ऑडिटर थे। उन्होंने शादी नहीं की थी और गांव में बदायूं रोड पर करीब 50 बीघा जमीन, गांव में आलीशान घर, बैंक में लाखों रुपये, बीमे व अन्य संपत्ति के मालिक थे। अब्दुल कुद्दूस के पिता अब्दुल जलील की मौत के बाद उनकी मां सिकंदरी बेगम ने रमजानपुर के ही मुईन अहमद से निकाह कर लिया था। मुईन अहमद से सिकंदरी बेगम ने बेटे गौस अहमद को जन्म दिया जो फिलहाल देहरादून में विकास विभाग के प्रशासनिक अधिकारी हैं। बताते हैं कि अविवाहित अब्दुल कुद्दूस रिटायर होने के बाद बीमार रहने लगे तो उनकी सगी बहन गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रिजवाना व सौतेले भाई गौस अहमद ने ही देखभाल और इलाज कराया। इस नाते अब्दुल कुद्दूस ने अपने जीते हुए ही रिजवाना और गौस अहमद के नाम अपनी संपत्ति की वसीयत रजिस्टर्ड करा दी।
11 मई 2018 को कुद्दूस की बरेली के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। उनके चालीसवें में एकजुट हुए परिवार के लोगों में संपत्ति को लेकर चर्चा हुई। यहां कुद्दूस के सगे भाई नब्बू की बेटी शमा व उसके पति महमूद अहमद की ओर से एक फौती (वरासत) पेश की गई। इसमें तहसील से सांठगांठ या फर्जी तरीके से दिखाया गया कि अब्दुल कुद्दूस ने अपनी संपत्ति भतीजी शमा के नाम कर दी है। इसका विरोध हुआ और गौस अहमद ने बदायूं एडीएम प्रशासन कोर्ट में विरासत दर्ज करने का वाद दायर कर दिया। यह वाद प्रक्रिया अंतिम चरण में थी और इस बीच कागजों में हेरफेर करने के लिहाज से महमूद अहमद ने रिश्ते के ममेरे भाई रजा अहमद के साथ ये खेल कर डाला।
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गौस अहमद बोले- मैं तो शरीफ समझता था महमूद को
देहरादून विकास विभाग के प्रशासनिक अधिकारी गौस अहमद ने बातचीत में कहा कि महमूद और उनकी पत्नी ने भाई के चालीसवें पर संपत्ति को अपना बताने की कोशिश की, तभी वह उनकी नजर से उतर गए। पहले वह उम्र के लिहाज से महमूद को शरीफ आदमी मानकर सम्मान करते थे। अब उनकी इस तरह की हरकत से उनका चेहरा बेनकाब हो गया है। उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही उनके और रिजवाना के नाम संपत्ति का दाखिल खारिज कर देगा। संवाद