बदायूूं। सरकारी योजनाओं समेत लगभग हर काम में जरूरी आधार कार्ड को शहर में वसूली का खेल बना दिया गया। लोगों से तीन सौ रुपये लेकर न केवल इंटररनेट कैफे में नए आधार कार्ड बनाए जा रहे हैं बल्कि संशोधन भी किया जा रहा है जबकि आधार कार्ड केवल बैंक और पोस्टऑफिस में ही बनाए जा सकते हैं। आधार बनाने व संशोधन के नाम पर तीन सौ रुपये मांगने की वीडियो वायरल हुई तो जिम्मेदारों में भी अफरातफरी मच गई। सभी एक दूूसरे को जिम्मेदार बताते नजर आने लगे। इधर मामले की सुगबुगाहट मिलते ही कैफे संचालक ने भी शुक्रवार को आधार बनाने और संशोधन का काम बंद रखा।
आज हर सरकारी योजना समेत बैंक आदि कामों में आधार अनिवार्य कर दिया गया है। पहले इन्हें बनाने का काम जनसेवा केंद्रों को दिया गया था, लेकिन जब वहां से वसूली और फर्जी कार्ड बनाने की शिकायतें आईं तो यूआइडीएआई (यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने इसका काम बैंकों और पोस्टऑफिस को दे दिया। वर्तमान में भी जिले की एसबीआई, आईसीआईसीआई, सिंडीकेट, पीएनबी आदि बैंक और पोस्टऑफिस पर यह काम चल रहा है। स्पष्ट आदेश हैं कि किसी भी जनसेवा केंद्र में आधार नहीं बन सकते, लेकिन शहर के पटेल मार्केट में यह खेल काफी दिन से चल रहा है। केवल इतना ही नहीं आधार बनाने और संशोधन करने के नाम पर आवेदकों से तीन-तीन सौ रुपये की वसूली की जा रही है। वैसे तो ये गोरखधंधा काफी समय से चल रहा है लेकिन शुक्रवार को इसकी वीडियो वायरल हुई तो मामला खुल गया। किसी ने गुरुवार को इसका वीडियो बनाया और इसे वायरल कर दिया।
क्या है वीडियो में
जवाहरपुरी स्थित पटेल मार्केट में स्थित एक इंटरनेट कैफे में बनी इस वीडियो में आवेदक ने जब दुकान पर बैठे लड़के से आधार में जन्मतिथि संशोधन कराने के बारे में पूछा तो उसने उसकी फीस तीन सौ रुपये बताई, जबकि नया आधार कार्ड बनाने के भी तीन सौ रुपये मांगे गए। वीडियो में इसके बराबर में स्थित दूसरे कैफे पर भी आधार कार्ड बनाने का काम साफ दिख रहा है। ---------------------
तकनीक को भी दे रहे धोखा
जनसेवा केंद्रों पर आधार बनने के दौरान फर्जीवाड़े और वसूली की शिकायतें जब यूआईडीएआई तक पहुंची तो आधार प्रक्रिया को जीपीएस से जोड़ने का फैसला लिया गया। पहले जब शिकायत होती थी तो जनसेवा केंद्र संचालक दूसरी जगह बैठकर मशीन ऑपरेट करने लगते थे, जिससे वह पकड़ में नही आ पाते थे, लेकिन जीपीएस से जोड़ने के बाद उन्हें अपनी लोकेशन बताना अनिवार्य कर दिया गया। इसके बाद संचालक को पहले अपने सिस्टम को जीपीएस से जोड़कर अपनी लोकेशन फीड करनी होती थी। इस तकनीक में भी एक कैफे संचालक ने छेद कर लिया। पटेल मार्केट में आधार कार्ड बनाने वाला एक कैफे संचालक लगभग डेढ़ माह पहले उझानी स्थित एसबीआई में आधार कार्ड बना रहा था, लेकिन बाद में उसने कार्ड बनाना बंद कर दिया। बताया जाता है कि इसके बाद वह रोजाना उझानी में लैपटॉप ले जाकर पहले जीपीएस के माध्यम से अपनी लोकेशन सेट करता है और उसके बाद ऑन किया हुआ लैपटॉप बदायूूं लाकर कार्ड बनाता है।
कई दिनों से चल रहा काम, प्रशासन सो रहा
आधार बनाने का काम कई दिनों से चल रहा है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी खबर तक नहीं लगी, जबकि ये कैफे बरेली रोड पर स्थित हैं। यहां रोजाना सुबह से ही आवेदकों की भीड़ लग जाती है जो देर शाम तक लगी रहती है। इधर से प्रशासनिक अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में संभव नहीं लगता कि शहर के बीचोंबीच इस प्रकार अवैध तरीके से आधार बनाने का काम चल रहा हो और अधिकारियों को इसकी जानकारी न हो।
मामला पूछा तो संचालक बोला- ‘कार्रवाई करा दो’
शुक्रवार को मामले की चर्चा होने पर कैफे संचालकों ने आधार कार्ड बनवाने आए आवेदक लौटाने शुरू कर दिए। इस सबंध में जब एक साइबर कैफे के संचालक से जानकारी ली गई तो उसने डीओआईटीसी ( डिपार्टमेंट ऑफ इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी एंड कम्युनिकेशन) राजस्थान के माध्यम से आधार कार्ड संशोधन करने की बात स्वीकार की जबकि दूसरे साइबर क्लब संचालक बोला ‘आप कार्रवाई करा दो’।
आधार कार्ड केवल पोस्टऑफिस और बैंक में ही बन रहे हैं और यदि कोई प्राइवेट जगह पर बैठकर कार्ड बना रहा है तो गलत ही नहीं, बल्कि अपराध है। इस पर सजा भी हो सकती है। बैंक में जो आधार कार्ड बन रहे हैं उसमें ऑपरेटर को शाम को मशीन जमा करना आवश्यक है। यदि ऐसा कहीं हो रहा है तो बैंक की मिलीभगत के बिना नहीं हो सकता।
- राजेश शर्मा, एनआईसी प्रभारी
आधार कार्ड या तो पोस्टऑफिस में बनेंगे या बैंक में। बैंक में भी आधार कार्ड बनाने वाले को शाम को मशीन जमा कराना आवश्यक है। यदि बैंक से बाहर आधार कार्ड बन रहे हैं तो यह गलत है।
- श्याम पासवान, एलडीएम
कुछ समय पहले विकास पटेल नाम का युवक यहां आधार कार्ड बना रहा था, लेकिन डेढ़ माह से उसने काम छोड़ दिया है। अब वह कहां पर आधार बना रहा है इसकी जानकारी नहीं है। पता चला है कि अब वह बिसौली में कार्ड बनाने का काम कर रहा है।
- मधुकर मिश्रा, शाखा प्रबंधक, एसबीआई, उझानी
नए आधार कार्ड बनवाने की फीस कुछ भी नहीं है जबकि संशोधन करने का शुल्क केवल 50 रुपये है। ये भी केवल बैंक और पोस्टऑफिस में ही बन रहे हैं। यदि कोई बाहर बना रहा है तो वह अवैध है। जानकारी मिलने पर ऐसे व्यक्ति को पकड़कर जेल भेजा जाएगा।
-केके अवस्थी, सिटी मजिस्ट्रेट