कोरोना कर्फ्यू में पांच हजार लोगों को बांटा खाना, बनाया दवा बैंक
गौरव जैन, झांसी
कोविड महामारी में कोरोना कर्फ्यू के चलते रोजमर्रा कमाने वालों की आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई तब झांसी में गौरव जैन ने युवाओं की टीम तैयार की। कोरोना कर्फ्यू के दौरान वह पिछले एक महीने में पांच हजार जरूरतमंदों व मरीजों को खाना बांट चुके हैं। इसके अलावा दवा बैंक भी तैयार किया है। डॉक्टरों की मदद से वह गरीब लोगों को नि:शुल्क दवाएं दे रहे हैं।
शहर निवासी गौरव, सनी जैन, जीतू और अनूप जैन ने कोरोना की दूसरी लहर की शुरूआत में ही जरूरतमंदों की मदद की ठान ली थी। युवाओं की टीम ने सोशल मीडिया पर चार नंबर जारी किए और लिखा कि किसी भी जरूरतमंद को खाने की समस्या हो तो संपर्क करें। यही नहीं, कोविड अस्पताल के बाहर बैठे मरीजों के तीमारदारों के लिए भी भोजन की व्यवस्था की।
युवाओं की यह टीम झोपड़ पट्टियों में भी गई। वहां भी खाना बांटा और कोविड से बचाव के लिए मास्क और सैनिटाइजर भी दिए। हाल ही में इन्होंने दवा बैंक भी तैयार किया है। इसमें डॉक्टर भी शामिल हैं, अब दवाएं देने में मदद कर रहे हैं। ये दवाएं गरीबों को नि:शुल्क दी जा रही हैं।
कोरोना संक्रमित हुए तो फोन पर करने लगे इलाज
डॉ. विवेक वर्मा, शाहजहांपुर
राजकीय मेडिकल कॉलेज में नियुक्त डा. विवेक वर्मा कोरोना संक्रमित होने के बावजूद अपनी ड्यूटी से पीछे नहीं हटे। मरीजों को लगातार फोन पर इलाज और सलाह देते रहे। जैसे ही ठीक हुए तो पहुंच गए अस्पताल में अपनी सेवा देने।
मूल रूप से हरदोई के रहने वाले विवेक वर्मा पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज के एलटू आइसोलेशन वार्ड में कोरोना संक्रमितों का इलाज कर रहे थे। 24 मई से अब वे जूनियर रेजीडेंट डाक्टरों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। कोरोना संक्रमितों का इलाज करते-करते 17 अप्रैल को वह खुद बीमार हो गए थे। उन्हें निमोनिया हो गया था। जांच कराने पर रिपोर्ट में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। कुछ दिन आराम और इलाज के बाद जैसे ही स्वस्थ हुए उन्होंने फिर से अपनी जिम्मेदारी निभानी शुरू कर दी।
आइसोलेशन के दौरान भी डा. विवेक मरीजों के संपर्क में रहे और इलाज करते रहे। डॉ. विवेक की शादी लखनऊ में डॉ. कल्पना से हुई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज कैंपस में पत्नी के साथ डॉ. विवेक रहते हैं। डॉ. विवेक कहते हैं कि एलटू आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी के बाद जब घर जाते थे तो पूरी सावधानी बरतनी पड़ती थी। परिवार में भी ध्यान रखना पड़ता था। कोरोना संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। हर डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी पूरी तन्मयता से लोगों की सेवा में लगा है।