सरकारी दफ्तरों में पसरा दिखा सन्नाटा, देर तक न बैठ सके अधिकारी
कुछ अधिकारियों की ककराला विवाद ने उड़ाई नींद, मौके पर पहुंचे
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यक्रम में व्यवस्थाएं जंगल में मंगल जैसी थीं। किसी विशाल सभा के लिए ऐसा इंतजाम शायद ही कभी हुआ हो। मगर, यह कई दिनों की मशक्कत का प्रतिफल था। मुख्यमंत्री चले गए अगले दिन आफिस खुले तो अधिकारी उनींदी हालत में यहां दाखिल हुए, उनके साथ कर्मचारियों की भी लगभग यही दशा रही। प्रमुख सरकारी आफिसों में अधिकारी-कर्मचारी थके-थके से नजर आए।
मंगलवार को आफिस अन्य दिनों की भांति ही खुले, लेकिन सुबह जैसी ताजगी नहीं थी। कलक्ट्रेट से लेकर विकास भवन तक और जहां-जहां सरकारी ऑफिस सब थके-थके से नजर आए। क्यों न हो, मुख्यमंत्री के आगमन पर सभी ने कड़ी मेहनत की और व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने में पूरी ताकत लगा दी। सांसद की अपेक्षाओं पर व्यवस्थाएं खरी भी उतरीं। सोमवार को मुख्यमंत्री आए थे तो सरकारी महकमा पूरी व्यवस्थाओं में लगा रहा। हर छोटे से बड़े काम में अधिकारियों की ड्यूटी लगी। कार्यक्रम तो दोपहर में समाप्त हो गया, लेकिन शाम होने उनको लगा रहना पड़ा। अपने काम की वह समीक्षा तक नहीं कर सके। अगले दिन थकान इतनी हो गई कि जैसे किसी बारात के बाद विदाई पर घरातियों को होती है।
भूख और थकान का भी असर
मुख्यमंत्री की पहली सभा थी, जिसमें उन्हीं की पार्टी के लोगों ने जमकर तांडव किया। जो सभा के बाद हुआ, उससे इंतजाम कर्ताओं की प्रशंसा करने का मौका भी हवा हो गया। इस बुराई ने अच्छाई को भी दबा दिया। पार्टी समर्थकों ने मंच से सड़क तक खूब छिनैती की। यहां तक कार्यक्रम के बाद अधिकारियों और बाहर से आए मीडिया कर्मियों के लिए लाए गए नाश्ते के पैक्ड पैकेट तक छीन लिए। इन्हें संभालने को भी अधिकारियों ने बहुत कोशिश की थी, लेकिन छीनने वालों की संख्या इतनी थी कि दो-चार अधिकारी बस चिल्लाते ही रह गए। इस खसोट का सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल हो गया।