गंगा किनारे तटबंध पर चल रहा बाढ़ बचाव का काम। संवाद
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बदायूं। मानसून सक्रिय होने के साथ गंगा के जलस्तर में इजाफा होने लगा है। हालांकि, अब तक यह इजाफा मामूली है तटबंधों या तटवर्ती इलाके अभी प्रभावित नहीं हो रहे हैं लेकिन जल स्तर में इसी तरह से इजाफा होता रहा तो तटबंधों की मरम्मत और उच्चीकरण का काम प्रभावित होगा। शनिवार को कछला में मीटर गेज पर गंगा का जल स्तर 160.12 दर्ज किया गया। मीटरगेज पर खतरे का निशान 165.20 मीटर है।
शनिवार को गंगा में हरिद्वार से 39856, बिजनौर से 22651 और बिजनौर से 13830 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे पहले शुक्रवार को हरिद्वार से 32905, बिजनौर से 28439 और नरौरा से 1727 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। शुक्रवार को हरिद्वार से छोड़ा गया पानी शनिवार शाम छह बजे कछला पहुंचने के साथ कछला में गंगा का मीटर गेज बढ़कर 160.12 मीटर हो गया है। रविवार को नरौरा से और पानी छोड़े जाने का अनुमान है। इसके बाद जल स्तर में कुछ और भी इजाफा होने की आशंका बनी हुई है। हालांकि, गंगा में एक साथ एक लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी आने की दशा में गंगा फैलाव लेती हैं, ऐसे में फिलहाल खतरे जैसी कोई बात नहीं है।
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जल स्तर बढ़ने पर तटबंधों की मरम्मत का काम होगा प्रभावित
जिले में गंगा करीब 120 और रामगंगा 60 किमी की दूरी तय करती हैं। हर वर्ष बारिश और बाढ़ के सीजन में दोनों नदियों के तटवर्ती 150 से ज्यादा गांवों में तबाही होती है। संभावित बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए बाढ़ खंड की ओर से गंगा-महावा, चंदनपुर-हुसैनपुर, उसहैत और जोरी नगला तटबंधों पर इन दिनों मरम्मत और उच्चीकरण का काम चल रहा है। हालांकि, यह काम 30 जून तक पूरा होना था लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है। अगर गंगा के जल स्तर में ज्यादा इजाफा होता है तो गंगा के तटबंधों पर हो रहा बाढ़ बचाव का काम भी प्रभावित होगा। संवाद
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गंगा के जल स्तर में मामूली वृद्धि हुई है। शनिवार को गंगा में हरिद्वार से 39856, बिजनौर से 22651 और बिजनौर से 13830 क्यूसेक पानी छोड़ा है। तटबंधों का काम लगभग पूरा हो चुका है। शनिवार शाम छह बजे कछला में गंगा का जलस्तर मीटर गेज पर 160.12 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 165.20 मीटर पर है।
-नेशपाल सिंह, सहायक अभियंता बाढ़ खंड