बदायूं। शहर में सफाई तो काफी पहले से ही ‘फेसबुक’ पर हो रही थी, लेकिन अब तो सफाई व्यवस्था पर बधाई भी सोशल मीडिया पर मिल गई है, और वह भी किसी आमजन की नहीं बल्कि नगर विकास मंत्री एके शर्मा की। पालिका प्रशासन भले ही ये सोचकर इतराता रहे, लेकिन शहर का असल हाल यहां की जनता से ज्यादा किसे मालूम है जो जगह-जगह लगे कूड़े के ढेरों के पास से होकर रुमाल लगाकर निकलने को मजबूर है। शहर की शायद ही कोई ऐसी सड़क हो, जहां पर कूड़ा न पड़ा हो।
शहर की सफाई व्यवस्था का हाल किसी से छिपा नहीं है, लेकिन यहां के सफाईकर्मी, पालिका प्रशासन के साथ साथ अब अधिकारी भी इसे छिपाने में लगे हैं।
पालिकाध्यक्ष दीपमाला गोयल के अनुसार ऊपर से ही ड्रोन से सफाई की निगरानी की जा रही है। वैसे सुबह साढ़े पांच बजे से सफाई की जाती है, उसे वीडियो कांफ्रेंसिंग के से देखा जाता है।
इधर, स्वच्छ भारत मिशन के डीपीएम मोहम्मद स्वाले के अनुसार, सुबह साढ़े पांच बजे से सफाई के दौरान सारा कुछ जूम मीटिंग पर ऑनलाइन होता है। ऊपर से जहां चाहें वहां की स्थिति देख ली जाती है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि जब शहर का गंदगी से बुरा हाल है तो नगर विकास मंत्री को ऐसा क्या दिख गया जो उन्होंने पालिका के सफाई कर्मियों को बधाई दे डाली। जबकि वास्तविकता शहर की सारी जनता जानती है, कि इन सफाई कर्मियों पर पालिकाध्यक्ष और प्रभारी ईओ/सिटी मजिस्ट्रेट तक नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं।
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जहां भी नजर डालेंगे...गंदगी ही गंदगी पाएंगे
शहर का अब तो शायद ही कोई स्थान बचा हो, जहां कूड़े के ढेर न लगे हों। जफा की कोठी के पास, सुभाष चौक से पनबड़िया रोड, जोगीपुरा, शिवपुरम, शहवाजपुर तिराहा आदि स्थानों पर तो गंदगी स्थायी समस्या बन गई है। शहर में जहां पहले कभी कूड़ा नहीं पड़ता था, वहां भी कूड़ाघर बना दिए गए हैं। सफाई कर्मचारियों द्वारा यदि इन जगहों से कूड़ा उठाया भी जाता है तो सड़क पर इतना फैला दिया जाता है कि उससे अच्छा तो लगता है कि कूड़ा उठाया ही न जाए। यह कूड़ा सड़कों पर गंदगी को और ज्यादा बढ़ा देता है।
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वार्ड के हिसाब से तैनात किए गए थे सफाई कर्मचारी
सफाई रखने के लिए पालिका प्रशासन द्वारा कवायद तो की जाती है, लेकिन कुछ दिन सफाई व्यवस्था ठीक रहने के बाद में फिर वही हाल हो रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर से इस व्यवस्था में बदलाव किया गया है। इस बार वार्ड सदस्यों को भी जोड़ा गया है। इसके तहत संबंधित सफाई कर्मचारी वार्ड सदस्य के यहां पर बने रजिस्टर पर हस्ताक्षर करेंगे। उसके बाद में उनका वेतन निकाला जाएगा। ऐसे में वार्ड सदस्य अपने हिसाब से सफाई कर्मचारियों से काम कराकर वार्ड को साफ करा सकते हैं, लेकिन ऐसा भी नहीं हो पा रहा है।
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फैक्ट फाइल-
कुल सफाई कर्मचारी 350
संविदा कर्मचारी 43
दैनिक वेतन भोगी 23
बैकलॉग 43
सफाई नायक 18
जेसीबी दो
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सुबह के समय सभी लोग फील्ड में रहते हैं। सभी से बात की जाती है कि व्यवस्था कैसी चल रही है। वैसे सारी व्यवस्था ऑनलाइन देखी जाती है। कुछ फोटो यहां से भी भेजे जाते हैं। प्रदेश भर में यह प्रक्रिया चल रही है। जो अच्छा काम हो रहा है, उसको कुछ विशेष नंबरों पर भेज दिया जाता है। इसके लिए पूरा कंट्रोल रूम बनाया गया है, जिसकी मॉनीटरिंग राज्य स्तर पर हो रही है।
- मोहम्मद स्वाले, डीपीएम, स्वच्छ भारत मिशन