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दिसौलीगंज के ग्रामीणों ने खुद तोड़ना शुरू कर दिए मकान

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गांव दिसौलीगंज में हाईवे किनारे ग्रामीणों ने खुद ही तोड़ लिए मकान। संवाद - फोटो : BADAUN
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बिसौली। फोरलेन के लिए गांव दिसौलीगंज के लोगों ने अपने मकान खुद ही तोड़ना शुरू कर दिए हैं। टूट फूट के बाद कतई जगह न बचने से घबराए कई ग्रामीणों ने अपना सामान रिश्तेदारों के घर पहुंचाना शुरू कर दिया है। वहीं एक प्रधानमंत्री आवास भी फोरलेन की जद में आने से गरीब मोरसिंह खुले आसमान के नीचे आ जाएगा।
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यहां बता दें कि मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे के फोरलेन होने की कवायद एक बार फिर से शुरू हो गई है। ओरछी गांव से दिसौलीगंज तक लोनिवि द्वारा लाल निशान लगा दिए गए हैं। मकानों-दुकानों पर लाल निशान लगते ही हाईवे किनारे बसे लोगों में अफरातफरी है। बीते दिनों नायब तहसीलदार अजहर अली के नेतृत्व में पीडब्ल्यूडी के अधिकारी गांव दिसौलीगंज में बुलडोजर लेकर पहुंचे तो ग्रामीणों ने विरोध किया। नायब तहसीलदार ने हस्तक्षेप कर स्थायी अतिक्रमण पर उस वक्त तो बुलडोजर चलने से बचा लिया लेकिन ग्रामीणों को स्वयं अतिक्रमण तोड़ने की सलाह भी दे दी।
लोनिवि के जेई द्वारा इन मकानों पर नोटिस भी चस्पा कर दिए गए। इसके बाद ग्रामीणों ने अपने आवास खुद ही तोड़ना शुरू कर दिए।
कई ग्रामीणों ने तो अपना सामान रिश्तेदारों के घरों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। हाईवे किनारे अतिक्रमण की जद में मोरसिंह का प्रधानमंत्री आवास भी है जो वर्ष 2016-17 में बना था। इसी तरह मजदूरी कर घर चलाने वाले सर्वेश पत्नी स्व. सुरेश शर्मा, रूपेन्द्र प्रताप, डोरीलाल मौर्य, रामनाथ मौर्य, मिथिलेश पत्नी स्व. नरेशपाल के पूरे मकान लाल निशान की जद में हैं। इन गरीब परिवारों के सदस्य अब खुले आसमान के नीचे आ जाएंगे।
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स्थायी अतिक्रमण या किसी मकान-दुकान आदि को ध्वस्त करने जैसे कोई आदेश नहीं है। लोनिवि के जेई को तलब कर नोटिस चस्पा करने के संबंध में पूछा जाएगा। अभी कोई भी स्वयं अपनी जगह पर तोड़फोड़ न करें। -एसडीएम, ज्योति शर्मा
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