बदायूं। शहर में स्थायी अतिक्रमण तो बड़ी समस्या है ही, अस्थायी अतिक्रमण उससे भी बड़ा नासूर है। दुकानदारों ने नाले पाट लिए, उन पर दुकानें लगती हैं। जितनी दुकान अंदर होती है, उतनी ही बाहर निकालकर सामान सजा लिया जाता है। इससे भी ज्यादा यह कि अपनी दुकानों के आगे सड़क का हिस्सा तक ये दुकानदार रेहड़ी वालों को किराये पर उठा देते हैं। दुकान के सामने ठेला लगाने के दो से तीन सौ रुपये तक रोजाना वसूले जाते हैं।
शहर का कोई भी बाजार अतिक्रमण से अछूता नहीं रहा। बड़ा बाजार, छह सड़का, घंटाघर, पुराना बाजार, टिकटगंज, सुभाष चौक आदि स्थानों पर अतिक्रमण की समस्या सबसे ज्यादा है। दुकानदारों ने नाले नालियां पाटकर उन पर स्थायी अतिक्रमण कर लिया है। इसके बाद दुकानें कई कई फुट आगे बढ़ाकर लगाई जाती हैं। कई स्थानों पर तो यह हाल है कि दुकान अंदर कम और बाहर ज्यादा होती है। जो दिखता है वह बिकता है की तर्ज पर दुकानदार अपने सामान को सड़क पर ही सजा लेते हैं।
दूसरी सबसे बड़ी दिक्कत अस्थायी अतिक्रमण की भी है। हालांकि इन छोटे दुकानदारों के रोजगार का सवाल भी है, लेकिन जनता की परेशानी इससे ज्यादा है। कई स्थानों पर तो दुकानदार अपने दुकान के सामने सड़क पर ठेला आदि लगवाने का बाकायदा किराया लेते हैं।
-
छह सड़का से घंटाघर जाने वाले रोड पर समस्या सबसे ज्यादा
घंटाघर से छह सड़का जाने वाला मार्ग बहुत व्यस्त है। इसी रोड पर तहसील, सब्जी मंडी, मुख्य बाजार, बैंक समेत कई प्रमुख जगह हैं, जिससे इस रोड पर भीड़ अच्छी खासी रहती है। यह रोड खासी चौड़ी है लेकिन ठेले वालों के कारण यह संकरी दिखाई देती है। कभी कभी तो यहां जाम भी लग जाता है। यहां लगभग सभी दुकानों के आगे ठेले वाले खड़े होते हैं। कुछ नाम न छापने की शर्त पर बताते भी है कि उनकी मजबूरी है सड़क पर ठेला लगाना, लेकिन उनकी इस मजबूरी का फायदा वे दुकान वाले उठाते हैं, जिनकी दुकान के आगे उनका ठेला लगता है। इसके लिए वह उनसे दो सौ से तीन सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वसूलते हैं।
-
आज से अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। पिछले दिनों घंटाघर से चूनामंडी तक अतिक्रमण हटवाया गया था। जिन लोगों ने स्वयं अतिक्रमण नहीं तोड़ा तो वहां पर जेसीबी की मदद से हटवा दिया जाएगा। जिन व्यापारियों ने अपनी दुकानों के आगे फुटपाथ पर अतिक्रमण कराया है, उन व्यापारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
-अमित कुमार, प्रभारी ईओ/ सिटी मजिस्ट्रेट