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एआरटीओ और एक लिपिक को आरटीओ ने किया तलब, शासन को भेजी रिपोर्ट

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बदायूं। एक मृतक को एआरटीओ कार्यालय में उपस्थित दिखाकर उसके भाई के नाम बाइक ट्रांसफर करने का मामला काफी आगे बढ़ गया है। इसमें कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इस संबंध में शनिवार को आरटीओ बरेली ने एआरटीओ प्रशासन आरबी गुप्ता और लिपिक मनोज कुमार गौतम को तलब किया। उन्होंने इस संबंध में रिपोर्ट बनाकर भी शासन को भेजी है।
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आरोप है कि कुछ दिन पहले एआरटीओ कार्यालय के लिपिक मनोज कुमार गौतम ने कबूलपुरा के मृतक को कार्यालय में उपस्थित दिखाकर उसके फोटो पर हस्ताक्षर किए थे। बाद में उसके नाम की बाइक उसके भाई के नाम ट्रांसफर कर दी थी। यह फाइल एआरटीओ प्रशासन आरबी गुप्ता के सामने भी पहुंची थी। उन्होंने भी बिना जांच पड़ताल किए हस्ताक्षर कर दिए और फिर यह फाइल लिपिक के पास पहुंच गई। आरोप हैं कि इसके लिए रुपये भी लिए गए थे। अमर उजाला ने इस फर्जीवाड़े का खुलासा किया। तब विभागीय अधिकारियों में खलबली मची।
उसके बाद से एआरटीओ प्रशासन संबंधित लिपिक और बाइक ट्रांसफर कराने वाले व्यक्ति को नोटिस जारी कर चुके हैं। लिपिक मनोज कुमार गौतम अपना स्पष्टीकरण दे चुका है। अभी बाइक ट्रांसफर कराने वाले का जवाब नहीं आया है। इस संबंध में एआरटीओ पद्नाम से सिविल लाइंस पुलिस को पत्र देकर बाइक क्रेता पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी की गई है। इसमें एफआईआर नहीं हुई है। शनिवार को आरटीओ बरेली कमल कुमार गुप्ता ने एआरटीओ आरबी गुप्ता और लिपिक मनोज कुमार गौतम को तलब कर लिया। संबंधित फाइल देखकर उन्होंने इसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी है। इसमें संबंधित लिपिक के खिलाफ कार्रवाई होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
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इस नियम से ट्रांसफर होनी थी बाइक
मृतक की बाइक ट्रांसफर कराने का नियम दूसरा है। ये मृतक की संपत्ति मानी जाती है। इसके लिए परिवार वालों को वारिसान बनना पड़ता है। उन्हें न्यायालय में ये साबित करना पड़ता है कि मृतक उनके परिवार का सदस्य था और वह उसके वारिसान हैं। उसकी संपत्ति या बाइक के जितने वारिसान होते हैं। सभी के नाम आती है। फिर वह चाहे एक व्यक्ति के नाम बाइक ट्रांसफर कर सकते हैं या फिर उसे बेच सकते हैं।
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कार्यालय में वाहन ट्रांसफर कराने का नियम
एआरटीओ कार्यालय में वाहन ट्रांसफर कराने का नियम यह है कि इसमें क्रेता और विक्रेता दोनों को कार्यालय आना पड़ता है। सबसे पहले उन्हें दो फार्म नंबर 29 और एक फार्म नंबर 30 भरना पड़ता है। ये प्रक्रिया ऑनलाइन भी है। यह फार्म संबंधित हलका वाहन ट्रांसफर लिपिक के पास जाएगा। वह क्रेता और विक्रेता के फोटो सीन करेंगे। दोनों को देखकर फाइल आगे बढ़ाएंगे। फोटो पर हस्ताक्षर कर फाइल एआरटीओ प्रशासन को भेज दी जाती है। बाद में यह फाइल फिर से लिपिक के पास आती है।
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फर्जीवाड़े में जेल जा चुका है एआरटीओ कार्यालय का एक लिपिक
एआरटीओ कार्यालय में एक लिपिक ऐसा भी है जो बिजनौर में तैनाती के दौरान फर्जीवाड़ा करने के मामले में पकड़ा गया था। वह करीब दो साल तक जेल में भी रहा। बताते हैं कि वहां लिपिक ने दूसरे प्रदेश के 45 ट्रक फर्जी तरह से ट्रांसफर कर दिए थे। इसके लिए मोटा रुपया लिया गया था। इसमें वहां के एआरटीओ को भी निलंबित किया गया था।
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शनिवार को एआरटीओ प्रशासन और लिपिक मनोज कुमार गौतम को बरेली कार्यालय बुलाया गया था। उन्हें फाइल लाने को भी कहा गया था। उनका स्पष्टीकरण ले लिया गया है। हमने इसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी है। वहीं से इस संबंध में कार्रवाई होगी।
- कमल कुमार गुप्ता, आरटीओ बरेली
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मैं बरेली कार्यालय नहीं गया था। वहां लिपिक को बुलाया गया था। आज मेरे रिश्तेदार की तबीयत खराब थी। इससे मैं उन्हें देखने बरेली चला गया था। हमने इसमें अपनी रिपोर्ट बनाकर भेज दी है। जो भी कार्रवाई होगी, शासन स्तर से होगी।
- आरबी गुप्ता, एआरटीओ प्रशासन
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मैंने इसमें कोई फर्जीवाड़ा नहीं किया है। बाइक ट्रांसफर कराने वाले ने ऑनलाइन आवेदन किया था। दोनों फोटो ऑनलाइन थे। इससे बाइक ट्रांसफर हो गई। अगर मैं इसमें दोषी हूं तो मेरे खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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- मनोज कुमार गौतम, लिपिक एआरटीओ कार्यालय
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