उझानी (बदायूं)। करीब डेढ़ दशक से दूषित पानी की समस्या से जूझ रहे नरऊ के लोगों के लिए अच्छी खबर है। जलजीवन मिशन के तहत नरऊ को शामिल किया गया तो पिछले दिनों जल निगम की देखरेख में नलकूप और ओवरहैड टैंक निर्माण के लिए एक निजी संस्था को काम सौंप दिया गया है। प्रोजेक्ट सोलर सिस्टम से जुड़ा है जो करीब चार महीने में अस्तित्व में आ जाएगा। संस्था की ओर से बोरिंग का काम भी शुरू करा दिया गया है। जिससे यहां जल्द ही स्वच्छ पेयजल की सप्लाई शुरू हो जाएगी।
केंद्र सरकार की योजना जलजीवन मिशन के तहत नरऊ का नाम विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले शामिल किया गया था। दरअसल, नरऊ गांव से सटे इलाके के तालाब में उझानी के नाले का पानी गिरता है। तालाब के दूषित पानी से इलाके में भू-गर्भ का पानी भी प्रदूषित हो गया। नरऊ और उसके मजरा मीहलाल नगला के नलों से मटमैला पानी निकलने लगा। दूषित पानी पीने से तीन साल के दौरान गांव में महिलाओं समेत पांच लोगों की मौत भी हो गई। इसके बाद प्रशासनिक स्तर से पहल शुरू हुई।
इसी क्रम में पूरे प्रोजेक्ट के बारे में ठेकेदार विनीत पांडेय ने बताया कि नलकूप सोलर एनर्जी से चलेगा। सोलर सिस्टम, नलकूप और ओवरहैड टैंक के निर्माण पर 2.67 करोड़ रुपया खर्चा आएगा। टैंक की क्षमता करीब एक लाख लीटर की होगी। नरऊ और मीहलाल नगला के घरों तक पाइप लाइन के जरिये स्वच्छ पेयजल पहुंचेगा। पाइप लाइन बिछाने का काम भी संस्था को ही पूरा करना है।
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कमिश्नर और डीएम भी आ चुके हैं नरऊ
करीब ढाई साल पहले दूषित पानी की वजह से लोगों के बीमारी की चपेट में आने के बाद मामला अखबारों की सुर्खियों में आया तो तत्कालीन मंडलायुक्त और तत्कालीन डीएम कुमार प्रशांत ने दो-तीन बार मौके पर आकर ग्रामीणों समेत मातहत अफसरों से जानकारी की थी। नगर पालिका परिषद की ओर से भी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए शासन को डीपीआर भेजी गई लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिल पाई थी। ग्रामीण दूषित पेयजल को लेकर हर बार आवाज बुलंद करते रहे हैं।
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चुनाव बहिष्कार से उड़ गई थी अफसरों की नींद
चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के दौरान ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार का बैनर गलियारे में टांग दिया था। ऐन मतदान वाले दिन ग्रामीणों ने चुनाव कार्य में जुटे अफसरों की बात भी नहीं मानी। वोट डालने के लिए कोई महिला-पुरुष घर से निकला तो अफसरों ने दो-तीन लोगों को समझा-बुझाकर वोट डलवा दिए थे। बताते हैं कि जिनके वोट पड़े, वह किसी ने किसी रूप में सरकारी कार्य से जुड़े रहे हैं। तत्कालीन विधायक धर्मेंद्र शाक्य ने भी जलजीवन मिशन में गांव का नाम शामिल कराने में भूमिका निभाई है।
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पहले चरण में 100 गांवों में काम पूरा होने के आसार
जलजीवन मिशन के तहत बदायूं जिले में पांच सौ गांवों को चिह्नित किया जा चुका है। वैसे तो हर गांव को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए योजना के तहत काम चल रहा है लेकिन फिलहाल सौ गांवों में नलकूपों का काम शुरू होने का दावा किया जा रहा है। इसकी मॉनीटरिंग प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से की जा रही है। नरऊ में काम जल्द पूरा कराने के पीछे स्थानीय अफसरों का मकसद लोगों को दूषित पेयजल की समस्या से निजात दिलाना है।