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कभी कदम तो रखो हुजूर... हम कदम से कदम न मिलाएं तो कहना

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कदमनगला गांव से उसावां को जाने वाली जर्जर सड़क। संवाद - फोटो : BADAUN
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अमित सक्सेना
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बदायूं। सियासी दौर में सियासी वादों और दावों का जोर है। नेता दूरदराज उन गांवों में भी पहुंच रहे हैं जो कई मायने में विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर हैं। यह और बात है कि चुनाव जीतने के बाद हमेशा की तरह वह उन वादों को फिर भूल जाते हैं जो वह वोटरों से करके आ रहे हैं। उसावां ब्लॉक के गांव कदमनगला के लोग ऐसे ही वादों को सुनने के आदी हो गए हैं। उसावां और उसहैत से सीधा जुड़ाव न होने का दंश झेल रहे लोगों को फर्रुखाबाद जिले की सीमा के कस्बों से होकर आना-जाना पड़ता है।
दातागंज तहसील क्षेत्र के कुछ गांव गंगा नदी पार बसे हैं। इनमें दो ग्राम पंचायतों सिठौली खाम व खेड़ा जलालपुर खाम ग्राम पंचायतों के कुछ मजरे आते हैं। कदम नगला भी सिठौली खाम का बड़ा मजरा है। इन गांवों की भौगोलिक स्थिति कुछ ऐसी है कि आजादी के बाद से आज तक ग्रामीण किसी न किसी रूप में समस्याएं झेल रहे हैं। काफी प्रयासों के बाद अलग-अलग सरकारों में गांव के अंदर सड़क, नाली के कुछ काम तो हुए पर उसहैत से सीधा जुड़ाव न हो पाने की कसक आज भी लोगों के दिल में है।
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रोजमर्रा के तमाम कामों के लिए यहां के लोग फर्रुखाबाद जिले के कंपिल और शिवारा कस्बों को जाते हैं। किसी की तबीयत खराब होने पर निजी वाहन की व्यवस्था करके ही बदायूं जिला मुख्यालय या उसांवा लाना पड़ता है।
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नाव से खेड़ा जलालपुर वोट डालने आते हैं प्रेमी नगला वाले
गंगा के उस पार बसे गांवों में मतदान के दौरान पोलिंग पार्टियों से लेकर मतदाताओं तक को कई तरह की दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। पोलिंग पार्टियों को फर्रुखाबाद सीमा से होकर जाना पड़ता है। वहीं गंगा पार के कई गांव के लोगों को वोट डालने के लिए नाव से इस पार आना पड़ता है। इससे समय के साथ जोखिम भी उठाना पड़ता है।
सिठौली खाम ग्राम पंचायत में तीन गांव कदम नगला, दल नगला व रैपुरा हैं। इसका पोलिंग बूथ गांव कदम नगला के सरकारी स्कूल में बनाया जाता है। यहां जाने के लिए पोलिंग पार्टी को अटेना गंगा का पुल पार करने के बाद जिला फर्रुखाबाद के कंपिल व शिवारा होकर करीब 55 किमी का फेर खाकर आना पड़ता है। इसी तरह गंगा के उस पार के गांव प्रेमीनगला के लोगों को खजुरा पुख्ता में और कमलैयापुर के लोगों को गंगा के इस पार नाव से आकर खेड़ा जलालपुर में बने बूथों पर वोट डालना पड़ता है। इसमें लोगों को समय खराब करने के साथ वोट डालने के लिए भी जोखिम उठाना पड़ता है।
म्याऊ ब्लॉक के गांव मौसमपुर जतोली रामगंगा के उस पार हैं। वहां मतदान कराने वाली पोलिंग पार्टी को जिला शाहजहांपुर सीमा में होकर जाना पड़ता है।
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कदम नगला के लोग बोले
कदम नगला गांव में सड़क, स्कूल आदि की सुविधा तो हो गई हैं पर जिला मुख्यालय से सीझा जुड़ाव न होने की समस्या आज भी बरकरार है। जनप्रतिनिधियों को इस बारे में सोचना चाहिए।
- राकेश कश्यप, ग्राम प्रधान
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उसावां से अटेना पुल पार करके पंद्रह किमी दूर जटा गांव तक सड़क है। यहां से पांच किमी मनरेगा से डाला गया कच्चा रास्ता है। कोई जनप्रतिनिधि इस पांच किमी की सड़क को बनवा दे तो भी बहुत मदद मिलेगी।
- जयवीर सिंह
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उसहैत से हमारे गांव की दूरी गंगा पार करके केवल दस किमी है जो सड़क मार्ग से 27 किमी दूर हो जाती है। पहले भुंडी घाट पर पुल प्रस्तावित हो गया था पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने इसे अपने निर्वाचन क्षेत्र फर्रुखाबाद के अटेना घाट पर शिफ्ट करा लिया। भुंडी पर पैंटून पुल भी बन जाए तो समस्या दूर हो जाएगी।
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- धीरेंद्र यादव
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कई बार चर्चा चली है कि हमारे गांवों को फर्रुखाबाद जिला प्रशासन के अधीन कर दिया जाए पर हम इसके लिए तैयार नहीं हैं। बदायूं जिले से हमारा पुराना व भावनात्मक रिश्ता है। उसहैत से सीधा जुड़ाव होने के बाद वह और पक्का हो जाएगा।
- पृथ्वीराज
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