बदायूं। खामोशी बेसबब नहीं होती, दर्द आवाज छीन लेता है...कुछ ऐसी ही खामोशी आसफपुर के गांव बीधानगला निवासी प्राथमिक स्कूल की रसोइया श्यामकली के चेहरे पर दिखती है। श्यामकली की जिंदगी दुश्वारियों से भरी पड़ी है। पंक्ति के अंतिम छोर के शख्स तक योजनाओं का लाभ देने की अंत्योदय अवधारणा वाली सरकार की मदद भी श्यामकली तक नहीं पहुंच सकी है। बेसहारा श्यामकली अपने बेटे समेत तीन बच्चों का सहारा जरूर बनी हुई है। सरकारी इमदाद में उसके पास न घर है और न राशनकार्ड। स्कूल की पंद्रह दिन की छुट्टी होने से फाकाकशी का माहौल जरूर है, घर का चूल्हा तक बुझ गया है।
श्यामकली के पति सोनपाल कश्यप भूमिहीन थे और मजदूरी से परिवार पालते थे। उनकी कुछ समय पहले मौत हो गई। उनकी बीमारी में घर की शेष जमा पूंजी लगी तो 31 हजार का कर्ज भी श्यामकली के सिर आ गया। श्यामकली सरकारी स्कूल की रसोइया है पर पंद्रह सौ का मामूली मानदेय भी तीन महीने से नहीं मिला है। तीन बेटियों की शादी पति कर चुके थे। दस साल का बेटा बॉबी उसके साथ रहता है। देवर व देवरानी की भी मौत हो चुकी है। उनके 14 साल के बेटे हरीश और 12 साल की बेटी नेहा को भी वही पाल रही हैं।
श्यामकली को पीएम योजना के आवास, राशनकार्ड, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, जमीन पट्टा व पारिवारिक लाभ योजना से लेकर किसी और तरह का लाभ आज तक नहीं मिला है। हालांकि कई साल पहले उसके कच्चे घर की झोपड़ी के पास शौचालय जरूर बना है। राशनकार्ड न होने से उसे सरकारी अनाज भी नहीं मिल पाता। अब तक स्कूल के मिडडेमील का बचा खाना परिवार के एक वक्त का काम चला देता था पर शीतकालीन अवकाश के बाद वह भी बंद हो गया है।
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तेज बुखार में दवा लेने को भी रुपये नहीं
मुफलिसी में सरकार भले न सही, पड़ोसी जरूर परिवार की मदद करते हैं। स्कूल बंद होने के बाद पड़ोसी नन्नुकी पंडित पांच किलो आटा दे गए जो रविवार को खत्म हो गया। तब दूसरे पड़ोसी के घर से रोटी का जुगाड़ कर श्यामकली ने अपना और बच्चों का पेट भरा। तीन दिन से उसे तेज बुखार है पर दवा लेने के लिए भी रुपये नहीं है। वह कहती है कि उस पर न कोई रुपया न ही कोई पैरवी है। दलाल उससे कहते हैं कि बिना पैसे के कुछ नहीं होगा।
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प्रधान बोलीं - राशनकार्ड बनवाएंगे
बीधानगला की प्रधान विमला देवी ने कहा कि श्यामकली बेहद गरीब है। कहा कि उसका राशनकार्ड पहले था जो निरस्त हो चुका है। जल्द ही अधिकारियों से मिलकर राशनकार्ड जारी कराने का प्रयास करेंगी। वैसे गांव वाले भी उसकी मदद करते रहते हैं।
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कोटेदार बोले-कैसे दें राशन
बीधानगला के राशन डीलर बलवंत ने बताया कि राशनकार्ड न होने की वजह से श्यामकली को वह राशन नहीं दे सकते हैं। हालांकि उसके पति का दसवां संस्कार हुआ तो उन्होंने मानवीय आधार पर उसे राशन दे दिया। गांव की निवासी और बेहद गरीब होने के बाद भी राशनकार्ड न होने की वजह को वह टाल गए।
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आसफपुर के गांव बीधानगला में महिला को क्या समस्या है, संबंधित अधिकारियों को भेजकर परिवार के बारे में जानकारी कराएंगे। अगर वास्तव में कोई गरीब परिवार है तो वह शासन की सभी संभव योजनाओं का हकदार है, उसे उसका हक दिलाया जाएगा।
- दीपा रंजन, डीएम